राष्ट्रीय
13-Apr-2026
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-यह बम विशेष रूप से मजबूत और संरक्षित ठिकानों को निशाना बनाने किया तैयार नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत अपनी युद्धक क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। रूस-यूक्रेन और ईरान जंग ने दुनिया की तस्‍वीर बदल दी है। हर देश अपने पास ज्‍यादा से ज्‍यादा विनाशक हथियार जमा करने में जुटे हैं। फाइटर जेट, मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्‍टम, घातक बम, ड्रोन समेत कई वेपन सिस्‍टम पर फोकस किया जा रहा है। भारत भी पीछे नहीं है। स्‍वदेशी तकनीक से नेक्‍स्‍ट जेनरेशन फाइटर जेट डेवलप करने के लिए एएमसीए प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया है। अग्नि और ब्रह्मोस के बाद भारत के डिफेंस साइंटिस्‍ट अन्‍य घातक और उन्‍नत मिसाइल बनाने में जुटे हैं। कुछ मिसाइल प्रोजेक्‍ट को पूरा भी किया जा चुका है, तो कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक स्‍टील्‍थ ड्रोन सिस्‍टम के क्षेत्र में भारत ने बड़ी सफलता हासिल कर घातक यूसीएवी ड्रोन तैयार किया है। यह कॉम्‍बैट ड्रोन रडार और एयर डिफेंस सिस्‍टम को चकमा देकर टारगेट पर सवार करता है। इसके अलावा एयर डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत करने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र लॉन्‍च किया है। इसके अलावा भारत एक और सेक्‍टर में काम कर रहा है – प्रिसिजन बम। कुछ सप्‍ताह पहले अग्नि सीरीज के तहत बंकर बस्‍टर बम डेवलप करने की बात सामने आई थी। अब भारत प्रिसिजन गाइडेड ग्‍लाइड बम हासिल करने में जुटा है। यह बम कितना घातक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका वजन 1500 किलोग्राम है। 1500 किलो बारूद के साथ यदि किसी टरगेट पर अटैक किया जाएगा तो उसकी स्थिति क्‍या होगी, इसका बस अंदाजा ही लगाया जा सकता है। इंडियन एयरफोर्स अपनी लंबी दूरी की सटीक हमलावर क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठा सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत रूसी मूल के यूपीएबी-1500 कैटेगरी के प्रिसिजन-गाइडेड ग्लाइड बम को अपने एसयू-30एमकेआई लड़ाकू विमान बेड़े के साथ इंटीग्रेट करने पर विचार कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य खास तौर पर किलेबंद और हाई-वैल्‍यू वाले टारगेट पर सुरक्षित दूरी से सटीक हमले करने की क्षमता को बढ़ाना है। यूपीएबी-1500 एक भारी ग्लाइड बम है, जिसका वजन करीब 1500 किलोग्राम होता है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे लक्ष्य से काफी दूरी पर छोड़ा जा सके, जिससे हमला करने वाला विमान दुश्मन के एडवांस एयर डिफेंस सिस्‍टम की पहुंच से बाहर रह सके। यह बम विशेष रूप से मजबूत और संरक्षित ठिकानों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है। इसमें हाई-एक्‍सप्‍लोसिव वारहेड लगाया जाता है, जो बंकर, किलेबंद सैन्य ठिकाने, एयरबेस इंफ्रास्ट्रक्चर और अहम लॉजिस्टिक केंद्रों को भेदने में सक्षम है। इस तरह के लक्ष्यों पर सटीक और प्रभावी हमले के लिए यह हथियार उपयोगी साबित हो सकता है। यह चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी उच्च सटीकता बनाए रखता है. इसकी सर्कुलर एरर प्रॉबेबल सिंगल-डिजिट मीटर रेंज में बताई जाती है, जो इसे अपनी श्रेणी के अन्य एडवांस ग्लाइड बमों के बराबर खड़ा करती है। सिराज/ईएमएस 13 अप्रैल 2026