अंतर्राष्ट्रीय
13-Apr-2026
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वॉशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक नए मोड़ पर आ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के अड़ियल रुख पर कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया है कि यदि ईरान बातचीत की मेज पर वापस नहीं लौटता, तो उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। पाकिस्तान में हाल ही में संपन्न हुई वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों और समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर सख्त रुख अख्तियार कर लिया है और नौसेना को नाकेबंदी का आदेश भी दे दिया है। मैरीलैंड के जॉइंट बेस एंड्रयूज पर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, मुझे परवाह नहीं है कि वे बातचीत के लिए वापस आते हैं या नहीं। अगर वे नहीं आते, तो भी मुझे कोई दिक्कत नहीं है। ट्रंप ने ईरान पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि तेहरान ने होर्मुज जलमार्ग को खुला रखने का वचन दिया था, जिसे उसने पूरा नहीं किया। इस फैसले के कारण आज पूरी दुनिया को आर्थिक मुश्किलों और पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है। ट्रंप ने ईरान के उन दावों को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि ईरान ने समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं। ट्रंप ने कहा कि हकीकत यह है कि ईरान की नौसेना पूरी तरह तबाह हो चुकी है और वह केवल अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन कर रही है। राष्ट्रपति ने अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिया है कि अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में उन सभी पोतों को रोका जाए जिन्होंने ईरान को अवैध शुल्क चुकाया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि अवैध शुल्क देने वालों को समुद्र में सुरक्षित मार्ग नहीं दिया जाएगा। विवाद की मुख्य जड़ परमाणु मुद्दे पर असहमति है। ट्रंप ने दोहराया कि तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं ही शांति के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा हैं। दूसरी ओर, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने पलटवार करते हुए चेतावनी दी है कि होर्मुज पूरी तरह उनके नियंत्रण में है और अमेरिका का कोई भी गलत कदम उसे घातक भंवर में फंसा सकता है। वर्तमान में ट्रंप के पास तीन मुख्य विकल्प हैं पहला बातचीत का रास्ता खुला रखना, दूसरा सैन्य कार्रवाई को तेज करना और तीसरा होर्मुज की पूर्ण नाकेबंदी करना। चूंकि दुनिया का 20 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए किसी भी कड़े कदम का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर पड़ना तय है। फिलहाल, ट्रंप को उम्मीद है कि दबाव के चलते ईरान अंततः उनकी शर्तों पर समझौते के लिए मजबूर होगा। वीरेंद्र/ईएमएस/13अप्रैल2026