अंतर्राष्ट्रीय
13-Apr-2026


वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिका हार रोज, हर घंटे ईरान को डराने और धमकाने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद भी ईरान किसी भी कीमत पर अमेरिका के आगे झुकने को तैयार नहीं है। इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता विफल होने के बाद अब अमेरिका हमले की धमकी दे रहा है और इसकी तैयारी भी उसने शुरु कर दी है। ताजा घटनाक्रम के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके रणनीतिक सलाहकार अब ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य हमलों को फिर से शुरू करने की योजना पर विचार कर रहे हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब अमेरिका ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह ब्लॉक करने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक, भारतीय समयानुसार सोमवार शाम 7:30 बजे से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों के संकेत मिल रहे हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास ईरान को झुकाने के लिए कई सैन्य विकल्प मौजूद हैं। इनमें पहला विकल्प सीमित हवाई हमलों के जरिए ईरान के सामरिक ठिकानों को निशाना बनाना है ताकि तेहरान पर दबाव बढ़ाया जा सके। हालांकि, बड़े पैमाने पर बमबारी के विकल्प पर भी विचार हो रहा है, लेकिन क्षेत्र में व्यापक अस्थिरता के डर से इसे फिलहाल अंतिम विकल्प के तौर पर रखा गया है। इसके अलावा, अमेरिका एक अस्थायी नाकेबंदी लागू कर अपने सहयोगी देशों को समुद्री सुरक्षा का साझा जिम्मा उठाने के लिए मजबूर कर सकता है। इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच इजरायल ने भी खुद को पूरी तरह हाई अलर्ट मोड पर डाल दिया है। इजरायली सेना को किसी भी समय सैन्य कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए गए हैं। इजरायल का मानना है कि पिछला संघर्ष बहुत जल्दी समाप्त हो गया था, जिससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं पर पर्याप्त अंकुश नहीं लग सका। अब इजरायल न केवल युद्ध के दोबारा शुरू होने की तैयारी कर रहा है, बल्कि ईरान की ओर से होने वाले किसी भी संभावित जवाबी हमले से निपटने के लिए भी मुस्तैद है। इस्लामाबाद वार्ता के टूटने के पीछे मुख्य कारण अमेरिका की वे कड़ी शर्तें हैं, जिन्हें ईरान ने अपनी संप्रभुता पर हमला बताया है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करे, परमाणु ठिकानों को नष्ट करे और क्षेत्रीय समूहों जैसे हमास व हिज़्बुल्लाह को समर्थन देना बंद करे। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची का कहना है कि समझौता बहुत करीब था, लेकिन आखिरी समय में अमेरिका ने शर्तें बदलकर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई, जिसे तेहरान कभी स्वीकार नहीं करेगा। अब पूरी दुनिया की नजरें सोमवार शाम को होने वाली नाकेबंदी और उसके बाद होने वाली सैन्य हलचलों पर टिकी हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/13अप्रैल2026