13-Apr-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। संसद के विशेष सत्र से पहले महिला आरक्षण को लेकर सियासी माहौल गरमाया हुआ है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार पर इस बिल को “राजनीतिक स्टंट” के रूप में पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी मुद्दे पर 15 अप्रैल को होने वाली सर्वदलीय बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय करेगी। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के अनुसार, “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” का मूल उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना है,इसका कांग्रेस पहले भी समर्थन कर चुकी है। हालांकि, उन्होंने मोदी सरकार की मंशा पर सवाल उठाकर कहा कि इस बिल को वर्तमान में राजनीतिक लाभ के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है। यह विधेयक महिला आरक्षण को नई जनगणना और परिसीमन से जोड़ता है, जिससे इसके लागू होने में देरी की आशंका बनी हुई है। मोदी सरकार की योजना के अनुसार, जनगणना में देरी को देखकर परिसीमन के लिए 2011 के आंकड़ों का उपयोग किया जा सकता है। प्रस्तावित संशोधनों के बाद लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 तक हो सकती है। इस प्रक्रिया के तहत एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, इस विधेयक में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए अलग से कोई आरक्षण प्रावधान नहीं है, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। 16 अप्रैल से शुरू होने वाले तीन दिवसीय विशेष संसदीय सत्र में इस विधेयक और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। इन दोनों को संवैधानिक संशोधन के रूप में पारित करना आवश्यक होगा, जिसके लिए व्यापक राजनीतिक सहमति जरूरी है। इस बीच, नई दिल्ली में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में नरेंद्र मोदी ने इस पहल को “नारी शक्ति को समर्पित ऐतिहासिक कदम” बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं की भागीदारी बढ़ाकर लोकतंत्र को और मजबूत करेगा। आशीष दुबे / 13 अप्रैल 2026