महू/सेंधवा (ईएमएस)। भारत रत्न एवं संविधान शिल्पी डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर उनकी जन्मस्थली महू में भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने श्रद्धांजलि अर्पित कर कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता की। प्रातःकाल श्री आर्य ने बाबासाहेब के जन्मस्थली स्मारक पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और आयोग की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं नागरिक उपस्थित रहे। संवैधानिक सुरक्षा राष्ट्र की प्रगति का आधार मीडिया से चर्चा करते हुए श्री आर्य ने कहा कि बाबासाहेब द्वारा निर्मित संवैधानिक ढांचा आज देश के वंचित, शोषित एवं जनजातीय समाज के अधिकारों की सबसे बड़ी सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब का “समतामूलक भारत” का सपना आज भी देश के विकास का मार्गदर्शक है। उन्होंने सभी देशवासियों को जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आयोग जनजातीय समाज के अधिकारों की रक्षा एवं उनके सर्वांगीण विकास के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। *परिजनों के साथ आत्मीय भेंट* श्रद्धांजलि के पश्चात श्री आर्य बाबासाहेब के परिजनों द्वारा आयोजित निजी कार्यक्रम में भी शामिल हुए। यहां उन्होंने बाबासाहेब के चित्र पर माल्यार्पण कर परिजनों से आत्मीय मुलाकात की तथा सामाजिक समरसता एवं एकता के विषय पर विचार-विमर्श किया। *विश्वविद्यालय में उच्च स्तरीय बैठक* इसके बाद श्री आर्य डॉ. बी.आर. अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय पहुंचे, जहां कुलगुरु प्रो. रामदास आत्राम ने उनका स्वागत किया। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में स्थित बाबासाहेब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। इसके उपरांत आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में जनजातीय अनुसंधान, शोध परियोजनाओं एवं समाज की वर्तमान चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। श्री आर्य ने विश्वविद्यालय को जनजातीय विकास के लिए प्रभावी शोध, नवाचार और नीतिगत सुझावों पर अधिक कार्य करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, आयोग के अधिकारी एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। बाबासाहेब की जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम ने सामाजिक न्याय, समानता और समरसता के संदेश को और अधिक सुदृढ़ किया। हेमंत गर्ग, 14 अप्रैल, 2026