राज्य
14-Apr-2026


* खर्च सीमा का उल्लंघन या जानकारी छुपाने पर कार्रवाई, उम्मीदवार की उम्मीदवारी भी हो सकती है रद्द अहमदाबाद (ईएमएस)| स्थानीय निकाय की चुनाव प्रक्रिया में अब खर्च का लेखा-जोखा रखना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि यह एक कानूनी अनिवार्यता बन चुका है। चुनाव आयोग द्वारा उम्मीदवारों को एक निर्धारित फॉर्म उपलब्ध कराया जाता है, जिसमें प्रत्येक एक रुपये का विस्तृत विवरण दर्ज करना अनिवार्य है। इस फॉर्म में सबसे पहले उम्मीदवार का नाम, निर्वाचन क्षेत्र और अन्य मूलभूत जानकारी भरी जाती है। इसके बाद खर्च से संबंधित प्रमुख विवरण दर्ज किए जाते हैं, जिनमें तारीख, खर्च का प्रकार, खर्च का विवरण, राशि, भुगतान का तरीका तथा बिल या वाउचर नंबर शामिल होते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान होने वाला हर खर्च—चाय-नाश्ता, मंडप निर्माण, मीटिंग में माइक-साउंड सिस्टम, बैनर-पोस्टर, वाहन किराया या सोशल मीडिया प्रचार—सभी को इस फॉर्म में दर्ज करना आवश्यक है। किसी भी प्रकार का खर्च छिपाना या बिना रिकॉर्ड के रखना गंभीर अपराध माना जा सकता है। फॉर्म में दैनिक खर्च दर्ज करने के लिए ग्रिड प्रणाली भी दी गई है, जिससे उम्मीदवार हर दिन का हिसाब नियमित रूप से रख सकें और कोई भी दिन छूट न जाए। महत्वपूर्ण बात यह है कि चुनाव आयोग प्रत्येक चुनाव के लिए खर्च की अधिकतम सीमा तय करता है। इस सीमा का उल्लंघन नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अतिरिक्त निवासी कलेक्टर बी.आर. सागर के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रत्येक उम्मीदवार के लिए खर्च पंजी रखना अनिवार्य है। सभी खर्चों की सही और समय पर प्रविष्टि आवश्यक है तथा निर्धारित सीमा के भीतर ही खर्च करना चाहिए, अन्यथा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। चुनाव के दौरान फ्लाइंग स्क्वॉड और वीडियो सर्विलांस टीमें लगातार निगरानी रखती हैं। किसी भी अनियमितता की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सकती है, और गंभीर मामलों में उम्मीदवार की उम्मीदवारी भी रद्द हो सकती है। मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए दिया जाने वाला चाय-नाश्ता या अन्य सुविधाएँ भी अब खर्च के रूप में शामिल की जाती हैं, ताकि चुनाव प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बनी रहे। चुनाव समाप्त होने के बाद उम्मीदवार को पूरा खर्च विवरण संबंधित चुनाव अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है। इससे स्पष्ट है कि चुनाव में सफलता केवल प्रचार पर निर्भर नहीं है, बल्कि नियमों का पालन और पारदर्शी खर्च प्रबंधन भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। सतीश/14 अप्रैल