* बाबासाहेब को श्रद्धांजलि देते हुए शिक्षा, समता और सामाजिक न्याय को बताया राष्ट्र निर्माण की आधारशिला * राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए सामाजिक समरसता और अंत्योदय को बताया अनिवार्य * गुजरात में ग्रामीण विकास, नारी सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता पर जोर, राज्यपाल की गांव-केंद्रित जनसंवाद पहल की सराहना गांधीनगर (ईएमएस)| बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अध्यक्षता में मंगलवार को गांधीनगर स्थित लोकभवन में ‘सामाजिक समरसता महोत्सव’ आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी तथा उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी उपस्थित रहे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बाबासाहेब आंबेडकर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबासाहेब ने केवल संविधान का निर्माण ही नहीं किया, बल्कि देश की आधुनिक प्रगति और सामाजिक न्याय की मजबूत नींव रखी है। बाबासाहेब ने भगवान बुद्ध के ‘भवतु सब्ब मंगलम्’ सिद्धांत का अनुसरण करते हुए समतावादी समाज रचने के लिए समता समाचार पत्र द्वारा जनजागृति फैलाई थी। राष्ट्रपति ने सामाजिक समरसता, शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर बल देते हुए कहा कि समाज के सुदूरवर्ती व्यक्ति को मुख्यधारा में लाना ही सच्ची राष्ट्रसेवा है। बाबासाहेब ने भारत के संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित प्रतिष्ठा और अवसर की समानता शब्द ही हमारा अंतिम लक्ष्य है। बाबासाहेब के ‘शिक्षित बनो’ संदेश पर बल देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा ही विकास की सच्ची कुंजी है। संविधान में शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया है। विशेषकर वंचित और पिछड़े वर्गों के लोग अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए प्रेरित हों, यह सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने नैतिक शिक्षा द्वारा सामाजिक समरसता की भावना को मजबूत करने पर विशेष बल दिया। राष्ट्रपति ने गांवों को भारतीय संस्कृति का वाहक बताते हुए कहा कि देश की आत्मा गांवों में बसती है। समरस भारतीय समाज का निर्माण समरस गांवों के बिना संभव नहीं है। गांवों में आज भी जाति-भेद से ऊपर उठकर जो परस्पर प्रेम और सौहार्द दिखाई देता है, वही सच्ची भारतीयता है। जब गांव आत्मनिर्भर और सुविधायुक्त बनेंगे, तभी भारत सही अर्थों में विकसित बनेगा। अपने पिता की सीख को याद करते हुए राष्ट्रपति भावुक हुईं और कहा कि जब मैं पढ़ती थी तब मेरे पिता कहते थे; चाहे जितने बड़े बन जाओ, लेकिन हमेशा मुड़कर यह अवश्य देखो कि कोई जरूरतमंद पीछे न रह जाए। आपकी व्यक्तिगत सफलता तभी सार्थक मानी जाएगी जब वह समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान में काम आए। गुजरात के डेयरी उद्योग और पशुपालकों के परिश्रम की प्रशंसा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत आज विश्व में दूध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है, जिसमें गुजरात की सहकारी संस्थाओं और पशुपालकों की भूमिका अग्रणी है। इस अवसर पर उन्होंने ओडिशा में पशुपालन मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान गौ-मित्र पद की रचना और गौ-सेवा द्वारा रोजगार बढ़ाने के प्रयोगों का भी स्मरण किया। राष्ट्रपति ने गुजरात में चल रहे सामाजिक समरसतायुक्त सर्वसमावेशी विकास के प्रयासों के लिए राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नेतृत्व की प्रशंसा की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गुजरात के लोग अपनी मेहनत से राज्य को पूर्ण रूप से विकसित और आत्मनिर्भर बनाएंगे। सामाजिक लोकतंत्र को जीवन पद्धति के रूप में अपनाकर स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को जीवित रखने का सभी से अनुरोध किया। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती के अवसर पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति को गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि उनका जीवन संघर्ष और तपस्या का प्रतीक है। विशेष रूप से आदिवासी समाज में शिक्षा का मार्ग प्रशस्त करके उन्होंने बेटियों के लिए पथप्रदर्शक का कार्य किया है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने शिक्षा का मार्ग अपनाकर तथा विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त कर भारत के संविधान के निर्माण द्वारा शोषितों और वंचितों को नई दिशा दी थी। बाबासाहेब का स्पष्ट मानना था कि न्याय, भाईचारा और समरसता ही राष्ट्र को मजबूत बनाते हैं। वेदों और शास्त्रों का संदर्भ देते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में जाति-भेद को कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि समय के साथ समाज में प्रवेश कर चुकी कुरीतियों को दूर करने के लिए स्वामी दयानंद सरस्वती, महात्मा गांधी और ज्योतिबा फुले जैसे महापुरुषों ने अनेक कार्य किए थे। आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अंत्योदय के विचार के साथ अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए सरकार कटिबद्ध है, ताकि भारत सही अर्थों में आत्मनिर्भर और विकसित बन सके। राज्यपाल ने अपने संकल्प के बारे में बात करते हुए कहा कि वे गुजरात के 267 तहसीलों में जाकर गांवों में रात्रि विश्राम कर जनसंवाद करेंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री के एक पेड़ मां के नाम और स्वच्छता अभियान के माध्यम से गांवों का कायाकल्प करना उनका लक्ष्य है। आगे उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी और विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी के सहयोग से राज्य सरकार द्वारा गांवों में शहर जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। उन्होंने राजकोट जिले के लूणीवाव गांव के गरीब परिवार के साथ भोजन करने के प्रसंग को याद करते हुए जोड़ा कि हृदय से हृदय का जुड़ाव ही सच्ची समरसता है। अंत में राज्यपाल ने आह्वान किया कि हम सभी एक ही ईश्वर की संतान के रूप में भाईचारा और परस्पर सम्मान विकसित करें। बाबासाहेब आंबेडकर के सपने को पूरा करने के लिए एकजुट और सशक्त भारत बनाने के लिए सामाजिक समरसता अनिवार्य है। जब समाज में ऊंच-नीच के भेद समाप्त होंगे और प्रत्येक नागरिक को समान सम्मान मिलेगा, तभी बाबासाहेब को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित मानी जाएगी। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने डॉ. बाबासाहब आंबेडकर की जयंती पर लोकभवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में आयोजित सामाजिक समरसता महोत्सव को बंधुत्व, भाईचारे और एक भारत, श्रेष्ठ भारत को सुदृढ़ करने वाला बताया। उन्होंने डॉ. आंबेडकर को कृतज्ञतापूर्वक भावांजलि देते हुए कहा कि बाबासाहब ने सभी को समान अवसर और सामाजिक न्याय के जरिए नारी शक्ति सहित सभी के विकास की वकालत की थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी डॉ. आंबेडकर के उसी विचार को साकार करने के लिए नारी शक्ति को शासन भागीदारी में अधिक अवसर प्रदान करने के लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस संदर्भ में कहा कि 16 अप्रैल को आयोजित होने वाले संसद के विशेष सत्र के सुसंगत हर किसी को को नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन करके विकसित भारत के निर्माण में नारी शक्ति के अधिक से अधिक योगदान को प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने डॉ. बाबासाहब द्वारा समानता और समरसता का दायरा बढ़ाने के लिए दिए गए महत्वपूर्ण योगदान का भी स्मरण किया। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संविधान की वंदना के साथ शासन दायित्व संभालकर दलितों, पीड़ितों, शोषितों और वंचितों के कल्याण को प्राथमिकता दी है। पटेल ने यह भी कहा कि मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जन धन योजना और पीएम स्वामित्व योजना जैसी अनेक जनहितकारी योजनाओं के सबसे अधिक लाभार्थी वंचित, पीड़ित और शोषित समुदाय के लोग हैं। मुख्यमंत्री ने सामाजिक समरसता के लिए राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत जी द्वारा राज्य की 267 तहसीलों के गांवों में जाकर रात्रि ठहराव, जनसंवाद और वंचित परिवारों के यहां भोजन करने की पहल की सराहना की। इतना ही नहीं, उन्होंने इन गांवों में राज्यपाल द्वारा प्राकृतिक खेती, वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियान जैसे जनजागरूकता अभियानों में लोगों को जोड़कर सामाजिक समरसता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की भी प्रेरणा देने के लिए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा भी वंचितों के विकास और सर्वग्राही कल्याण के लिए लागू की गई योजनाओं की सफलता की जानकारी दी। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विश्वास व्यक्त किया कि सामाजिक समरसता को गति देकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प को पूरा करने में गुजरात अग्रणी रहेगा। उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने उपस्थित महानुभावों का स्वागत करते हुए कहा कि गुजरात की यह पुण्यधरा हमेशा सामाजिक न्याय और समरसता की साक्षी रही है। डॉ. बाबासाहब आंबेडकर की जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी की उपस्थिति प्रत्येक नागरिक के लिए आशा की किरण बन गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान ‘संविधान गौरव यात्रा’ और ‘कन्या केळवणी’ (कन्या शिक्षा) जैसे अभियानों के माध्यम से समरसता को आधुनिक स्वरूप दिया है। इस अवसर पर संघवी ने राज्यपाल आचार्य देवव्रत के दृष्टिकोण की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे स्वयं साधारण नागरिक की तरह सार्वजनिक परिवहन में यात्रा करके गांवों तक पहुंचते हैं और गरीब परिवारों के साथ समय बिताकर उनकी चिंता करते हैं, जो सामाजिक समरसता का उत्तम दृष्टांत है। उन्होंने यह विश्वास भी व्यक्त किया कि राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में गुजरात सरकार समाज के सभी वर्गों के समान और सर्वांगीण विकास के लिए कटिबद्ध रहेगी। सतीश/14 अप्रैल