* राष्ट्रपति ने अजीत डोभाल को मानद डॉक्टरेट से किया सम्मानित, राष्ट्रीय सुरक्षा में उनके योगदान की सराहना * परास्नातक और पीएचडी के कुल 562 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई * साइबर क्राइम, डेटा सुरक्षा और डीप टेक पर जोर—आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप तैयारी की आवश्यकता * राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने युवाओं से राष्ट्र प्रथम के भाव के साथ विकसित भारत 2047 में योगदान का किया आह्वान गांधीनगर (ईएमएस)| राष्ट्रीय सुरक्षा एवं पुलिस प्रशिक्षण क्षेत्र की देश की अग्रणी संस्था, राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी (आरआरयू) में मंगलवार को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की गरिमामय अध्यक्षता में पांचवां दीक्षांत समारोह सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल विशेष रूप से उपस्थित रहे। राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के पांचवें दीक्षांत समारोह में दीक्षांत भाषण देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि दीक्षांत समारोह किसी भी शैक्षणिक संस्था के लिए गौरव का क्षण होता है, क्योंकि वह राष्ट्रहित के लिए शिक्षित, प्रशिक्षित और समर्पित युवा पीढ़ी समाज को समर्पित करती है। उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि यही युवा शक्ति देश के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य का आधार है। इस अवसर पर उन्होंने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान कर विशेष गौरव की भावना व्यक्त की। राष्ट्रपति ने बदलते समय की सुरक्षा चुनौतियों के बारे में बात करते हुए जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल युग के आगमन के साथ साइबर क्राइम, फिशिंग अटैक और डेटा सुरक्षा जैसे नए खतरे देश के सामने बड़े संकट के रूप में उभरे हैं। पहले ये शब्द केवल परिचय तक सीमित थे, लेकिन आज ये वास्तविक चुनौती हैं। ऐसी परिस्थिति में राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाओं का महत्व तथा जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है, क्योंकि देश की सुरक्षा का सुचारु संचालन अब आधुनिक तकनीकी कौशल पर निर्भर है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश को आज ऐसे कुशल पुलिस अधिकारियों की आवश्यकता है जो साइबर अपराधियों को पकड़ने और उन्हें सजा दिलाने के लिए तकनीकी रूप से सक्षम और सशक्त हों। इसके साथ ही न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए ऐसे फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भी आवश्यकता है जो न्यायालय की कसौटी पर खरे उतरने वाले प्रमाण प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने जोड़ा कि अब सुरक्षा केवल भौगोलिक सीमाओं या पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा और कूटनीति पारंपरिक शक्ति जितनी ही महत्वपूर्ण बन गई हैं। राष्ट्र की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के बारे में बात करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सुरक्षा के लिए आवश्यक शस्त्रों और साधनों के उत्पादन में भारत आत्मनिर्भर बने, इस दिशा में सरकार ठोस प्रयास कर रही है। राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी द्वारा ‘डीप टेक’ संबंधित नीतियों में उद्योगों के साथ किया गया जुड़ाव प्रशंसनीय है। उन्होंने सुझाव दिया कि रक्षा क्षेत्र में बदलते रुझानों को ध्यान में रखते हुए यूनिवर्सिटी को अपनी रणनीति लगातार अपडेट करनी चाहिए, ताकि देश के आर्थिक विकास और समृद्धि के लिए सुरक्षित परिवेश मिल सके। सूचना प्रौद्योगिकी तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ‘इंडिया एआई मिशन’ और एआई गवर्नेंस के माध्यम से भारत विश्व पटल पर महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर रहा है। 2026 तक भारत इस क्षेत्र में और अधिक सशक्त बनकर उभरेगा, जो देश की सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए गेम-चेंजर सिद्ध होगा। साइबर सुरक्षा अब केवल सुरक्षा का विषय नहीं है, बल्कि यह डिजिटल विश्वास का भी अभिन्न अंग है। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने सुरक्षा बलों के कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि हाल ही में नक्सलवाद के विरुद्ध सुरक्षा बलों ने निर्णायक विजय प्राप्त किया है। देश के जिन क्षेत्रों में पहले भय का वातावरण था, वहां आज शांति और सुरक्षा स्थापित हुई है। पहले जहां नक्सलवाद का लाल झंडा लहराता था, वहां आज देश का राष्ट्रध्वज लहरा रहा है। इस सफलता के लिए उन्होंने सभी राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की विशेष प्रशंसा की। राष्ट्रपति ने जोड़ा कि सुरक्षित वातावरण में ही व्यापार और आर्थिक समृद्धि फलती-फूलती है, इसलिए सुरक्षा कर्मियों का योगदान देश के विकास से सीधे जुड़ा है। शैक्षणिक और खेल क्षेत्र में यूनिवर्सिटी की उपलब्धियों की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह यूनिवर्सिटी खेलकूद और शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट कार्य कर रही है। यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और कुश्ती जैसे खेलों में पदक जीतकर संस्था का नाम रोशन किया है। उन्होंने सभी विजेताओं को बधाई देते हुए खेल क्षेत्र में और प्रगति करने के लिए प्रोत्साहित किया। विशेष रूप से दीक्षांत समारोह में छात्राओं के प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि इंजीनियरिंग और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में पदक प्राप्त करने में छात्राएं अग्रणी हैं, यह देखकर अत्यंत खुशी होती है। बेटियों की यह प्रगति दर्शाती है कि वे आने वाले समय में रक्षा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। रक्षा और इंजीनियरिंग में बेटियों की यह प्रगति विकसित भारत का सशक्त चित्र प्रस्तुत करती है। राष्ट्रपति ने दीक्षित विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे सुरक्षित, न्यायपूर्ण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें। उन्होंने कहा कि आपके जैसे सक्षम और कुशल पेशेवरों के कारण ही भारत आने वाले समय में विकसित राष्ट्र के रूप में विश्व के सामने उभरेगा। देश के विकास के मार्ग पर आपकी सुरक्षा और सेवा अनिवार्य है। राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के पांचवें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने युवा शक्ति से देशभक्ति के संकल्प के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के मिशन में जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जिस रक्षा यूनिवर्सिटी का सपना देखा था, वह आज साकार होकर राष्ट्र निर्माण में आधारभूत योगदान दे रहा है। प्रधानमंत्री के मजबूत नेतृत्व और विजन के कारण ही देश में नक्सलवाद जैसी समस्याएं समाप्त हो रही हैं और सुरक्षा व्यवस्था अधिक सुदृढ़ बनी है। राज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के ऐतिहासिक निर्णय का उल्लेख करते हुए सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति की प्रशंसा की। उन्होंने पौराणिक उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को सत्य के मार्ग पर चलकर विध्वंसक शक्तियों का सामना करने के लिए प्रेरित किया। श्री अजीत डोभाल की उपस्थिति में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देश का युवाधन सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और आंतरिक तथा बाह्य सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए सज्ज है। अंत में उन्होंने उपाधि धारकों को बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्र के विकास के लिए समर्पण और तपस्या अनिवार्य है। प्रधानमंत्री जिस प्रकार अविरत कार्य कर रहे हैं, उसका अनुसरण करते हुए यदि युवा सुरक्षा मिशन में सहभागी बनेंगे तो भारत की सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने विद्यार्थियों को सीख दी कि युवा अपनी कर्तव्यनिष्ठा द्वारा देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दें। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के पांचवें दीक्षांत समारोह में डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों-अधिकारियों को राष्ट्र प्रथम के भाव के साथ देश के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने डॉ. बाबासाहब आंबेडकर की जयंती पर उन्हें वंदन करते हुए कहा कि डॉ. आंबेडकर द्वारा दिया गया संविधान समानता, न्याय और स्वतंत्रता के मूल्यों पर आधारित है। मुख्यमंत्री ने संविधान के इस मूल भाव को राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी से डिग्री प्राप्त करने वाले सभी के लिए अत्यंत प्रासंगिक करार दिया। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शिक्षा को व्यक्तिगत उन्नति या विकास का नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण का प्रभावी आधार मानते हैं। उन्होंने आगे कहा कि 2010 में नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में स्थापित रक्षा शक्ति यूनिवर्सिटी उनकी ही विजनरी लीडरशिप में राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के रूप में राष्ट्रीय फलक पर कार्यरत हुई है। मुख्यमंत्री ने इस दीक्षांत समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को राष्ट्रपति द्वारा दी गई डॉक्टरेट की मानद उपाधि को समग्र सुरक्षा तंत्र के लिए गौरव के समान बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रक्षा क्षेत्र में अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी और टेक्नोसेवी वर्कफोर्स की जो आवश्यकता बताई है, उसे इस यूनिवर्सिटी ने धरातल पर उतारा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले बेटियों की संख्या का स्वागत करते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विकसित भारत के निर्माण में रक्षा क्षेत्र में नारी शक्ति के बढ़ते प्रभाव का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी को नेशनल सिक्योरिटी, स्ट्रैटेजिक अफेयर्स, साइबर रेजिलिएंस, क्रिमिनल जस्टिस और कोस्टल विजिलेंस को सुदृढ़ करने वाले पाठ्यक्रमों के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने डिग्री धारकों का आह्वान किया कि वे देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के क्षेत्रों में अपने योगदान से प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प को करें। राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के पांचवें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से नवाजा। डॉक्टरेट की मानद उपाधि को स्वीकार करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा कि राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दीर्घदृष्टि का परिणाम है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में वर्ष 2008 में उन्होंने इस संस्थान की जो परिकल्पना की थी, वह आज वास्तविकता बनकर देश की सुरक्षा में अभूतपूर्व योगदान दे रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा को एक जटिल विषय करार देते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षा केवल सैन्य शक्ति या टेक्नोलॉजी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राष्ट्र का मनोबल और जनमानस की जागरूकता और इच्छाशक्ति सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डोभाल ने विद्यार्थियों को प्रेरणा देते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, परन्तु यह पूरे देश का सामूहिक दायित्व है। सुरक्षा क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के पास अद्यतन ज्ञान संपदा, मजबूत चरित्र और परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण होना अनिवार्य है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सुरक्षा एक ऐसा क्षेत्र है जहां ‘सिल्वर मेडल’ जैसा कुछ नहीं होता, यहां या तो विजय मिलती है या पराजय। यदि आप जीतते हैं तो राष्ट्र सुरक्षित रहता है और यदि हारते हैं तो अस्तित्व ही दांव पर लग जाता है। अंत में उन्होंने युवा दीक्षार्थियों को आधुनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए निरंतर तैयार रहने और राष्ट्र सेवा के मिशन में पूरी क्षमता के साथ जुड़ जाने का आह्वान किया। उल्लेखनीय है कि कीर्ति चक्र और राष्ट्रपति पुलिस मेडल जैसे सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित श्री अजीत डोभाल भारतीय इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया क्षेत्र में उनका योगदान अमूल्य है। उनके मार्गदर्शन में भारत की सुरक्षा नीतियां अधिक मजबूत बनी हैं। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने गुजरात की पवित्र धरती को नमन करते हुए कहा कि यह भूमि महात्मा गांधी जी, सरदार वल्लभभाई पटेल और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसे महापुरुषों की जन्मभूमि है। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि आज का दिन केवल डिग्री प्राप्त करने का नहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा और न्याय प्रणाली के संरक्षक बनने के संकल्प का दिन है। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह संस्थान राष्ट्रीय सुरक्षा, पुलिस व्यवस्था और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत की दीर्घकालीन जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थापित किया गया राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है। देश की आंतरिक सुरक्षा के संबंध में बात करते हुए गृह राज्य मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में निर्णायक परिवर्तन किए हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी नेटवर्क को नेस्तनाबूद करके प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में सुरक्षा व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के समय में केवल शारीरिक क्षमता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि देश को टेक्नोलॉजी और आधुनिक चुनौतियों को समझ सके, ऐसे ‘ट्रेंड मैनपावर’ की जरूरत है। अंत में उन्होंने विद्यार्थियों से अनुरोध करते हुए तीन मूल बातों- सुरक्षा और स्वतंत्रता का समन्वय, न्यायिक सेवा के प्रति निष्ठा और राष्ट्र सेवा के लिए साहस, को जीवन में उतारने का आह्वान किया। राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. बिमल पटेल ने महानुभावों सहित उपस्थित सभी का स्वागत करते हुए यूनिवर्सिटी की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ और आंतरिक सुरक्षा में वैश्विक लीडर बनने के विजन के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने यूनिवर्सिटी की विभिन्न उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में विभिन्न कंपनियों के साथ शैक्षणिक भागीदारी और स्मार्ट प्रोग्राम जैसे प्रोजेक्ट्स यूनिवर्सिटी की नई पहल हैं। इसके अलावा, यूनिवर्सिटी द्वारा डेटा मैनेजमेंट सिस्टम और साइबर सुरक्षा शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा रहा है, जो डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत बनाएगा। उन्होंने आगे कहा कि यूनिवर्सिटी का लक्ष्य केवल शिक्षा देना नहीं है, बल्कि पुलिस बल को अधिक पेशेवर, नागरिक-केंद्रित और भविष्य के लिए तैयार करना है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश तक शैक्षणिक और सुरक्षा विषयक गतिविधियों का विस्तार करके राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी राष्ट्रीय सुरक्षा के नए मानदंड स्थापित कर रही है। मॉडल रिसर्च सेंटर के तौर पर उभरी यह यूनिवर्सिटी देश के सर्वांगीण विकास और सुरक्षित भविष्य के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। समारोह के दौरान विभिन्न संकायों के स्नातक, परास्नातक और पीएचडी के कुल 562 विद्यार्थियों को उपाधि दी गई। समारोह के प्रारंभ में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रुद्राक्ष का पौधा लगाया। इसके बाद राष्ट्रपति ने महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने महानुभावों और राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों के साथ फोटो खिंचवाई। सतीश/14 अप्रैल