नई दिल्ली,(ईएमएस)। मालदीव के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज्जू इस समय अपने कार्यकाल के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। इंडिया आउट के नारे के साथ सत्ता में आए मुइज्जू न केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर घिरते नजर आ रहे हैं, बल्कि घरेलू राजनीति और चरमराती अर्थव्यवस्था ने भी उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। ताजा घटनाक्रम में राष्ट्रपति मुइज्जू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत और दक्षिण-मध्य एशिया के अमेरिकी प्रतिनिधि सर्जियो गोर के साथ अपनी पूर्व निर्धारित बैठक को अंतिम समय में रद्द कर दिया। 23 मार्च 2026 को हुई इस घटना ने राजनयिक हलकों में खलबली मचा दी है। बताया जा रहा है कि सर्जियो गोर, जो भारत में अमेरिकी राजदूत भी हैं, मालदीव के आधिकारिक दौरे पर थे। हालांकि उन्होंने मालदीव के रक्षा और विदेश मंत्रियों से मुलाकात की, लेकिन मुइज्जू ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार, मुइज्जू का यह फैसला अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा इजरायली नीतियों के प्रति उनके कड़े रुख का परिणाम है। इस राजनयिक तल्खी का असर तब और साफ दिखा जब अमेरिकी दूत ने बंद कमरे में निजी बैठक के मालदीव के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और बिना राष्ट्रपति से मिले वापस दिल्ली लौट आए। मुइज्जू के लिए मुश्किलें केवल विदेशी मोर्चे तक सीमित नहीं हैं। 4 अप्रैल को हुए स्थानीय नगर निकाय चुनावों में उनकी पार्टी पीपुल्स नेशनल कांग्रेस (पीएनसी) को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। मुख्य विपक्षी दल मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) ने सभी पांच प्रमुख शहरों में मेयर के पदों पर कब्जा जमाते हुए क्लीन स्वीप किया है। इसके साथ ही, संसदीय और राष्ट्रपति चुनाव एक साथ कराने के सरकार के प्रस्ताव को भी जनता ने जनमत संग्रह में 60 प्रतिशत बहुमत के साथ खारिज कर दिया, जो सीधे तौर पर मुइज्जू की नीतियों के प्रति जन-असंतोष को दर्शाता है। आर्थिक मोर्चे पर मालदीव दिवालिया होने की कगार पर है। विदेशी कर्ज और बॉन्ड भुगतान के बोझ तले दबे मालदीव ने भारत से 400 मिलियन डॉलर के कर्ज को चुकाने के लिए 2 से 3 साल की अतिरिक्त मोहलत मांगी है। दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ मालदीव भारत से आर्थिक मदद की गुहार लगा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसने भारत को कूटनीतिक झटका देते हुए थिलाफुशी पोर्ट प्रोजेक्ट का काम चीन की कंपनी को सौंप दिया है। यह कदम तब उठाया गया है जब भारत पहले से ही माले को इसी पोर्ट से जोड़ने वाले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। घरेलू हार, विदेशी कर्ज और कूटनीतिक अस्थिरता के बीच राष्ट्रपति मुइज्जू की राह अब बेहद चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है। वीरेंद्र/ईएमएस/15अप्रैल2026