मनोरंजन
16-Apr-2026
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मुंबई (ईएमएस)। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण वाले बिल को अभिनेत्री रुपाली गांगुली ने एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए अपनी गहरी खुशी जाहिर की है। अभिनेत्री ने कहा कि यह बिल, जो 2023 में पारित हुआ था, अब अगले चुनावों से संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करेगा। मीडिया से चर्चा में रुपाली ने इस उपलब्धि को दशकों के संघर्ष का परिणाम बताया। रुपाली गांगुली ने कहा, सालों लगे, लगभग 27-28 साल लग गए। 2023 में बिल पास हुआ और अब जाकर यह लागू होने वाला है। यह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। पहले लगता था कि कोई पीछे से आ तो नहीं रहा, अब यह है कि मेरे पीछे मेरी सरकार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की सराहना करते हुए अभिनेत्री ने कहा कि महिलाओं के लिए इतने बड़े सुधार मोदी जी के आने के बाद ही संभव हो पाए हैं। उन्होंने सुकन्या समृद्धि योजना और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पहले जहां बच्चियों को जन्म के समय ही मार दिया जाता था, अब ऐसी खबरें सुनाई नहीं देतीं। गांगुली ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी हर महिला को अपनी मां, बहन और बेटी के रूप में देखते हैं और उन्होंने महिलाओं को बहुत सम्मान दिया है। उन्होंने कहा, मैं बहुत गर्व महसूस कर रही हूं कि मेरे देश में अब संसद में 33 प्रतिशत महिलाएं होंगी। सावित्रीबाई फुले के प्रसिद्ध वाक्य एक बाई शिकली तर पूर्णा परिवार शिकतो (एक महिला शिक्षित होती है तो पूरा परिवार शिक्षित होता है) का हवाला देते हुए, रुपाली ने कहा कि हमने एक लंबा सफर तय कर लिया है, लेकिन अभी भी बहुत काम बाकी है। समाज में लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए रुपाली ने कहा कि धीरे-धीरे मानसिकता बदल रही है। उन्होंने अपनी फिल्म धुरंधर और टीवी शो अनुपमा का उदाहरण देते हुए कहा कि ये कहानियां समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। अनुपमा में पहली बार टीवी पर जय श्री राम का नारा लगाया गया और रामनवमी दिखाई गई, जो पहले नहीं होता था। महिलाओं के आरक्षण के नीति-निर्माण पर पड़ने वाले असर के सवाल पर रुपाली ने कहा कि जब महिलाएं संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ आएंगी तो नीति-निर्माण में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने बताया कि महिलाएं एक मां, बेटी और बहन के नजरिए से सोचती हैं, जिसमें भावनात्मक दृष्टिकोण ज्यादा होता है। यह शिक्षा, महिला सुरक्षा और परिवार से जुड़े मुद्दों पर बेहतर नीतियां बनाने में मदद करेगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि पुरुषों में भावनाएं नहीं होतीं। रुपाली ने कहा, हम सशक्तिकरण की बात करते रहते हैं, लेकिन अब महिलाओं को असली शक्ति मिल गई है। जब महिलाएं खुद नीतियां बनाएंगी तो शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आएगा। रुपाली ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी तारीफ की और कहा कि उन्होंने राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और रात में उनके बाहर निकलने की स्थिति को बेहतर बनाया है। सुदामा/ईएमएस 16 अप्रैल 2026