राष्ट्रीय
16-Apr-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में बदलावों के साथ कई आम परेशानियां भी जुड़ी होती हैं। इन समस्याओं में अपच, पेट में भारीपन, गैस, एसिडिटी और भूख न लगना प्रमुख हैं। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही मानते हैं कि कुछ प्राकृतिक और घरेलू उपायों के जरिए इन समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। पेट की शांति का साथी आयुर्वेद में सौंफ को पाचन के लिए एक अत्यंत लाभकारी औषधि माना गया है। सौंफ में प्राकृतिक तेल और फाइबर प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो पेट की मांसपेशियों को आराम देते हैं और गैस बनने की प्रवृत्ति को कम करते हैं। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजनरोधी) और एंटीस्पास्मोडिक (ऐंठनरोधी) गुण भी पाए जाते हैं, जो पेट में ऐंठन, भारीपन और मतली को कम करने में सहायक होते हैं। सौंफ के दानों को चबाना या इसे पानी में उबालकर सौंफ का पानी पीना, इसके तत्वों को शरीर में अधिक आसानी से घुलने में मदद करता है, जिससे पाचन तंत्र शांत होता है और भोजन के बाद पेट हल्का महसूस होता है। यह गर्भवती महिलाओं को गैस और एसिडिटी से होने वाली बेचैनी में विशेष राहत प्रदान करती है। पाचन अग्नि के संरक्षक अदरक को आयुर्वेद में महा औषधि का दर्जा प्राप्त है, विशेषकर पाचन से संबंधित समस्याओं में। गर्भावस्था के दौरान होने वाली मतली (मॉर्निंग सिकनेस) और अपच के लिए अदरक बेहद प्रभावी मानी जाती है। विज्ञान के अनुसार, अदरक में जिंजरोल और शोगोल जैसे सक्रिय यौगिक होते हैं, जो पेट में बनने वाले अत्यधिक एसिड को संतुलित करते हैं और उल्टी की भावना को कम करते हैं। जब अदरक को नींबू के साथ मिलाया जाता है, तो इसकी प्रभावशीलता और भी बढ़ जाती है। नींबू विटामिन सी और प्राकृतिक एसिड से भरपूर होता है, जो पाचन रस (डाइजेस्टिव जूस) को सक्रिय करता है और भोजन को तेजी से पचाने में मदद करता है। अदरक और नींबू के इस मिश्रण को गुनगुने पानी के साथ लेने से पेट हल्का रहता है, भूख बढ़ती है और पूरे शरीर में एक नई ताजगी का अनुभव होता है। हाइड्रेशन और शीतलता का स्रोत गर्भावस्था में हाइड्रेशन अत्यंत महत्वपूर्ण है, और नारियल पानी इस उद्देश्य के लिए एक उत्कृष्ट प्राकृतिक विकल्प है। आयुर्वेद के अनुसार, यह शरीर को ठंडक प्रदान करता है और पित्त दोष को संतुलित करता है, जो गर्भावस्था में अक्सर बढ़ जाता है और एसिडिटी का कारण बनता है। नारियल पानी में पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं, जो शरीर को पर्याप्त रूप से हाइड्रेटेड रखते हैं, पेट की जलन को शांत करते हैं और मतली को कम करने में मदद करते हैं। जब शरीर अच्छी तरह से हाइड्रेटेड होता है, तो पाचन प्रक्रिया भी सुचारू रूप से काम करती है, जिससे अपच की समस्या कम होती है। नियमित रूप से ताजा नारियल पानी का सेवन करने से न केवल ऊर्जा बनी रहती है, बल्कि यह गर्भावस्था के दौरान होने वाली थकान को दूर करने में भी सहायक होता है। सुदामा/ईएमएस 16 अप्रैल 2026