राज्य
16-Apr-2026


हाईकोर्ट ने शहडोल जिला बार अध्यक्ष के खिलाफ दायर क्रिमिनल कंटेम्प्ट याचिका की खारिज जबलपुर, (ईएमएस)। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा तथा न्यायाधीश विनय सराफ की संयुक्तपीठ ने एक मामले में सुनवाई के बाद जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि महज महाधिवक्ता कार्यालय को पत्र भेजना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। महाधिवक्ता की सहमति के बिना क्रिमिनल कंटेम्प्ट (आपराधिक अवमानना) याचिका दाखिल नहीं की जा सकती। इसी आधार पर न्यायालय ने शहडोल जिला बार अध्यक्ष के खिलाफ दायर याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया। सागर निवासी रिटायर्ड एडिशनल एसपी मनोज वर्मा द्वारा दायर की गई उक्त याचिका में आरोप था कि शहडोल जिला बार अध्यक्ष राकेश सिंह ने 17 मार्च 2025 को एक महिला जज के साथ कथित अभद्रता की। याचिका में वकील के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई थी। मामले में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली संयुक्तपीठ ने न्या‎क अवमानना एक्ट, 1971 की धारा 15(1)(b) का हवाला दिया। उक्त एक्ट के प्रावधान के अनुसार किसी निजी व्यक्ति द्वारा आपराधिक अवमानना याचिका दाखिल करने से पहले महाधिवक्ता की लिखित सहमति अनिवार्य है। इस मामले में याचिकाकर्ता ने महाधिवक्ता से औपचारिक सहमति प्राप्त नहीं की थी। इस कारण संयुक्तपीठ ने कहा कि यह याचिका मेंटेनेबल (सुनवाई योग्य) नहीं रही। न्यायालय ने प्रारंभिक स्तर पर ही याचिका को खारिज कर दिया। मामले में राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अनुभव जैन ने पक्ष रखा। अजय पाठक / मोनिका / 16 अप्रैल 2026/ 02.47