राज्य
16-Apr-2026


हाईकोर्ट ने कहा-“जब अध्यक्ष और सदस्य ही नहीं रहेंगे, तो किस काम के बचेंगे उपभोक्ता फोरम” जबलपुर, (ईएमएस)। म.प्र. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मनिंदर एस भट्टी की संयुक्तपीठ ने प्रदेश में उपभोक्ता आयोगों (फोरम)में कामकाज ठप होने की आशंका के बीच अपनी तल्ख़ टिप्पणी में कहा कि जब फोरम में अध्यक्ष और सदस्य ही नहीं रहेंगे तो उनका क्या औचित्य रह जाएगा। इस मत के साथ एकलपीठ ने 5 सदस्यों को राहत देते हुए अपने जारी अपादेश में कहा है कि नई नियुक्तियां होने तक मौजूदा अध्यक्ष और सदस्य पद पर बने रहेंगे, भले ही उनका कार्यकाल समाप्त हो चुका हो। उच्च न्यायालय का यह आदेश अभी 5 सदस्यों की याचिकाओं पर आया है जबकि अभी 20 और याचिकाओं पर सुनवाई होना बाकी है। मंडला जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के सदस्य डॉ. प्रसन्न कुमार दुबे, श्योपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की सदस्य संगीता बंसल, पन्ना जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के सदस्य उमेश कुमार पटेल, भिंड जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की सदस्य डॉ. मीना शर्मा और मंडला जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की सदस्य डॉ. मुक्ता जोशी द्वारा दायर याचिकाओं ने राहत चाही गई थी कि जब तक नए नियम लागू नहीं होते और नई नियुक्तियां नहीं हो जातीं, तब तक उन्हें पद पर बने रहने की अनुमति दी जाए। मामले में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता अंकित सक्सेना ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला दिया, जिसमें उपभ्ररेक्तर प्रतितोष नियम, 2020 के नियम 10(2) को निरस्त किया गया था। इस फैसले के कारण नई नियुक्तियों की प्रक्रिया फिलहाल अटकी हुई है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ताओ का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें पद पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। एकलपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपने फैसले में कहा कि वहां पर यदि अध्यक्ष और सदस्य नहीं रहेंगे तो उपभोक्ता फोरम में न्यायिक कामकाज ठप हो जाएगा। इससे आम नागरिकों के मामलों के निपटारे पर असर पड़ेगा। कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक ऐसे ही मामले का भी हवाला दिया, जहां ऐसी स्थिति में पदाधिकारियों को जारी रखने की अनुमति दी गई थी। इसी आधार पर न्यायालय ने याचिकाकताओं कें पक्ष में आदेश जारी किया। अजय पाठक / मोनिका / 16 अप्रैल 2026/ 02.48