क्षेत्रीय
16-Apr-2026
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वाराणसी (ईएमएस)। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर संबोधि सभागार, समता भवन में “डॉ. अंबेडकर: जाति और अस्पृश्यता के संघर्षकर्ता” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता समन्वित ग्रामीण विकास केंद्र, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व डायरेक्टर प्रो. सत्येंद्र त्रिपाठी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय समाज में जाति व्यवस्था ने सामाजिक संरचना को गहराई से प्रभावित किया है, किंतु सामाजिक परिवर्तन संस्कृति और मानवीय क्रियाओं के माध्यम से संभव है। उन्होंने महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों की तुलना करते हुए बताया कि जहाँ गांधी ने ग्राम-स्तरीय परिवर्तन को प्राथमिकता दी, वहीं अंबेडकर ने व्यक्तिगत सशक्तिकरण और संवैधानिक उपायों को अधिक प्रभावी माना। उन्होंने अंबेडकर को एक वैश्विक चिंतक के रूप में प्रस्तुत किया, जिन्होंने सामाजिक बहिष्कार के विरुद्ध संघर्ष करते हुए मानवाधिकार और समानता की स्थापना के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। साथ ही, उनका प्रसिद्ध मंत्र—“शिक्षित बनो, संगठित हो, संघर्ष करो”—आज भी सामाजिक न्याय के लिए प्रेरणास्रोत है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, आईएमएस, बीएचयू के निदेशक प्रो. सत्य नारायण संखवार ने अपने संबोधन में कहा कि “अंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं,” जिन्होंने समाज के वंचित एवं शोषित वर्गों को मुख्यधारा में लाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने आगे यह भी कहा कि भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा अंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाया जा रहा है। अध्यक्षीय संबोधन में सामाजिक विज्ञान संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. अशोक कुमार उपाध्याय ने कहा कि डॉ. अंबेडकर एक ऐसे विचार हैं, जिन्हें प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में आत्मसात किया जाना चाहिए। उन्होंने समाज में विद्यमान द्वैत जैसे जाति और वर्ग आधारित विभाजन—का विरोध करते हुए समानता पर आधारित समाज के निर्माण पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सभी मनुष्य समान अधिकार और गरिमा के साथ एक साझा मानवीय समुदाय का हिस्सा हैं, अतः किसी भी प्रकार के सामाजिक विभाजन का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। कार्यक्रम में प्रो. अरविंद कुमार जोशी, प्रो. अखिलेश्वर लाल श्रीवास्तव, प्रो. जयकांत तिवारी एवं प्रो. सतीश राय ने भी अपने विचार व्यक्त किए। स्वागत भाषण प्रो. राम नारायण त्रिपाठी द्वारा दिया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. श्वेता प्रसाद ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन डॉ. विमल कुमार लहरी एवं डॉ. अरुणा कुमारी ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर सामाजिक विज्ञान संकाय के साथ-साथ वाराणसी के प्रबुद्ध नागरिकों एवं विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। - डॉ नरसिंह राम, 16 अप्रैल, 2026