ज़रा हटके
18-Apr-2026
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मेलबर्न (ईएमएस)। वैज्ञानिकों ने अत्याधुनिक क्वांटम बैटरी का प्रोटोटाइप विकसित किया है, जो रोशनी के जरिए चार्ज हो सकती है। एसआईआरओ, आरएमआईटी विश्वविद्यालय और मेलबर्न विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने मिलकर इस क्रांतिकारी तकनीक को विकसित किया है। पारंपरिक बैटरियां रासायनिक प्रक्रियाओं पर आधारित होती हैं, जिनमें चार्ज होने में समय लगता है। इसके विपरीत यह नई आर्गेनिक क्वांटम बैटरी क्वांटम मैकेनिक्स के सिद्धांतों पर काम करती है। इसमें लेजर ऊर्जा का उपयोग कर वायरलेस चार्जिंग को संभव बनाया गया है। इसकी सबसे खास विशेषता ‘सुपरएक्सटेंसिव चार्जिंग’ है, जिसका अर्थ है कि बैटरी का आकार जितना बड़ा होगा, वह उतनी ही तेजी से चार्ज होगी। यह पारंपरिक बैटरियों के उस सिद्धांत को चुनौती देता है, जिसमें आकार बढ़ने के साथ कार्यक्षमता घटती जाती है। एक शोध के अनुसार, वैज्ञानिकों ने मल्टी-लेयर्ड आर्गेनिक सेमीकंडक्टर का उपयोग किया है, जिससे लेजर के जरिए दूर से चार्जिंग संभव हो पाती है। इस तकनीक में माइक्रोकैविटी का इस्तेमाल किया गया है, जहां फोटॉनों को एक सूक्ष्म गुहा में फंसाकर ‘को-ऑपरेटिव’ प्रभाव के माध्यम से बैटरी को चार्ज किया जाता है। इसके साथ ही ‘सुपर-एब्जॉर्प्शन’ तकनीक ऊर्जा अवशोषण की दर को कई गुना बढ़ा देती है, क्योंकि इसमें क्विबिट्स मिलकर सामूहिक रूप से ऊर्जा को तेजी से ग्रहण करते हैं। एक और बड़ी उपलब्धि यह है कि यह बैटरी सामान्य कमरे के तापमान पर काम कर सकती है। आमतौर पर क्वांटम तकनीकों के लिए बेहद कम तापमान की जरूरत होती है, लेकिन आर्गेनिक मटेरियल के उपयोग से इस बाधा को दूर किया गया है। इस तकनीक का सबसे बड़ा असर इलेक्ट्रिक वाहनों और मोबाइल उपकरणों पर पड़ेगा। भविष्य में ‘ओवर-द-एयर’ चार्जिंग संभव हो सकती है, जिसमें गाड़ियों को प्लग से जोड़ने की आवश्यकता नहीं होगी। लेजर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन के जरिए उन्हें दूर से ही चार्ज किया जा सकेगा। इसके अलावा, यह बैटरी पारंपरिक बैटरियों की तुलना में समय के साथ कम खराब होगी, जिससे इसकी कार्यक्षमता लंबे समय तक बनी रहेगी। सुदामा/ईएमएस 18 अप्रैल 2026