गौरेला-पेंड्रा-मरवाही(ईएमएस)। जिले के गौरेला विकासखंड की ग्राम पंचायत चुकतीपानी में जल जीवन मिशन के दावों की जमीनी हकीकत सामने आ गई है। सरकार भले ही हर घर नल से जल पहुंचाने का दावा कर रही हो, लेकिन यहां संरक्षित बैगा आदिवासी समुदाय आज भी पीने के पानी के लिए मीलों दूर जाने को मजबूर हैं। यह गांव मैकल पर्वत की तराई में स्थित चुकतीपानी ग्राम पंचायत में आता है, जहां भूजल स्तर बेहद कम होने के कारण जल संकट गंभीर बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) द्वारा भौगोलिक स्थिति को नजरअंदाज कर अधूरी बोरिंग और अस्थायी व्यवस्था की गई, जिसके कारण गर्मी शुरू होते ही नल सूख जाते हैं। स्थिति इतनी खराब है कि एक ही स्थान पर तीन हैंडपंप और बोरिंग लगाए गए हैं, फिर भी ग्रामीणों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। बैगा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष सीताराम बैगा और स्थानीय समिति अध्यक्ष प्रेम लाल बैगा ने बताया कि पिछले वर्ष ‘अमानानाला’ से लिफ्ट सिस्टम के जरिए पानी पहुंचाने का आश्वासन दिया गया था, पाइपलाइन भी बिछाई गई, लेकिन आज तक उसमें पानी नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी में इंसान तो दूर, मवेशियों के लिए भी पानी जुटाना मुश्किल हो गया है। इससे आदिवासी परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी पर गंभीर असर पड़ रहा है। वहीं PHE विभाग के कार्यपालन अभियंता ने दावा किया है कि प्रोजेक्ट को फरवरी 2026 में पंचायत को हैंडओवर कर दिया गया है और अब संचालन की जिम्मेदारी पंचायत की है। विभाग के अनुसार, शिकायत मिलने पर स्टाफ भेजा गया और कुछ कमियां पाई गई हैं, जिन्हें सुधारने की प्रक्रिया जारी है। हालांकि जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब पाइपलाइन और बोरिंग के बावजूद पानी उपलब्ध नहीं है, तो जल जीवन मिशन का लाभ ग्रामीणों तक आखिर कब पहुंचेगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं हुआ तो गर्मी के हालात और भी भयावह हो सकते हैं। सत्यप्रकाश(ईएमएस)18 अप्रैल 2026