मुंबई (ईएमएस)। मुंबई में पिछले तीन दशकों के दौरान औसत तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही हीटवेव की आवृत्ति और तीव्रता भी बढ़ी है। समुद्र के किनारे होने के कारण यहां की नमी (ह्यूमिडिटी) गर्मी को और असहनीय बना देती है, जबकि तेजी से हो रहे कंक्रीट निर्माण ने स्थानीय तापमान को और बढ़ा दिया है। हाल ही में राज्य सरकार ने अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के लिए हीट मैनेजमेंट एडवाइजरी जारी की है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। आलम यह है कि सब्जी विक्रेता से लेकर मजदूर और ऑटो-टैक्सी चालक हर कोई भीषण गर्मी से परेशान हैं। सब्जी बेचने वालों का कहना है कि गर्मी के कारण उन्हें हर हफ्ते करीब 5 प्रतिशत सामान फेंकना पड़ता है। वहीं डिलीवरी कर्मियों को भी गर्मी के मौसम में काम करना बेहद कठिन हो गया है। हालाँकि वे लोग दोपहर 1 से 4 बजे के बीच काम से बचने की कोशिश करते हैं, लेकिन ऐसा करने पर उनकी कमाई कम हो जाती है। उधर भीषण गर्मी के चलते ऑटो चालकों को भी कमाई पर असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि “जितनी ज्यादा गर्मी बढ़ती है, उतनी ही कमाई घटती है। वे सुबह से रात तक काम करते हैं, लेकिन दोपहर में कुछ समय पेड़ की छांव में बिताकर राहत पाने की कोशिश करते हैं। एक लीटर पानी की बोतल साथ रखते हैं, लेकिन स्वास्थ्य समस्याओं के कारण ज्यादा पानी नहीं पी पाते। गर्मी के कारण सवारी भी कम हो जाती है, जिससे उनकी आमदनी और गिर जाती है। ऐप-आधारित सेवाओं में मांग कम और सप्लाई ज्यादा होने से किराया 30 प्रतिशत तक गिर जाता है। बहरहाल मुंबई में बढ़ती गर्मी केवल असुविधा का कारण नहीं है, बल्कि यह अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों की आजीविका पर भी सीधा असर डाल रही है। सरकार की एडवाइजरी के बावजूद, जमीनी स्तर पर सुविधाओं और सुरक्षा उपायों की कमी साफ दिखाई देती है। जानकारों का मानना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है। - स्वेता/संतोष झा-१९ अप्रैल/२०२६/ईएमएस