क्षेत्रीय
19-Apr-2026


जिलाधिकारी के निर्देश बेअसर या सिस्टम बेपरवाह? उपजिलाधिकारी सदर की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल हाथरस (ईएमएस)। श्री कृष्ण खेतान की मेंडू रोड स्थित खसरा संख्या 56 पर विकसित की जा रही कथित अवैध कॉलोनी का मामला अब केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न बनता जा रहा है। कई महीनों से जिलाधिकारी स्तर से लगातार निर्देश जारी होने के बावजूद उपजिलाधिकारी सदर कार्यालय द्वारा न तो अंतिम जांच आख्या प्रस्तुत की गई है और न ही कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है।प्राप्त अभिलेखों के अनुसार, कॉलोनी के संबंध में जिलाधिकारी को राजस्व हानि की शिकायत दी गई थी, जिसमें बिना स्वीकृत मानचित्र, बिना विकास अनुमति और आवश्यक सुविधाओं के अभाव में प्लॉटिंग किए जाने का आरोप लगाया गया। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ प्लॉटों की रजिस्ट्री ऐसे समय में की गई जब कागजों में भूमि खाली दर्शाई गई, जबकि मौके पर निर्माण कार्य मौजूद था।मामले के संज्ञान में आने पर 10 नवंबर 2025 को उपजिलाधिकारी सदर कार्यालय द्वारा संबंधित विभागों को भौतिक निरीक्षण कर 12 नवंबर तक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन निर्धारित समयसीमा बीतने के बाद भी जांच अधूरी ही रही। रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि 6 नवंबर 2025 से लेकर 6 अप्रैल 2026 तक कई बार जिलाधिकारी द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए, फिर भी शिकायत संख्या 20014425009503 आज तक लंबित बनी हुई है।सूत्रों के अनुसार, एक बार प्रस्तुत जांच आख्या को अस्वीकार कर पुनः जांच के आदेश दिए गए थे, लेकिन उसके बाद भी कोई स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आया। कॉलोनी विकासकर्ता को नोटिस जारी किए जाने की बात तो सामने आती है, मगर निर्माण रोकने, सीलिंग या अन्य कानूनी कार्रवाई को लेकर स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है।स्थानीय नागरिकों और प्लॉट खरीदारों में इसको लेकर गहरी चिंता है। उनका कहना है कि प्रशासनिक ढिलाई के कारण न केवल उनकी पूंजी फंसी हुई है, बल्कि भविष्य भी अनिश्चित हो गया है।इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक हलकों में चर्चा यह भी है कि आखिर बार-बार निर्देशों के बावजूद कार्रवाई आगे क्यों नहीं बढ़ रही। कुछ लोग इस देरी के पीछे संभावित अनियमितताओं की ओर भी इशारा कर रहे हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह मामला और अधिक पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग करता है।अब सबसे बड़ा सवाल जिलाधिकारी स्तर पर खड़ा हो रहा है—क्या केवल आदेश जारी करना ही पर्याप्त है, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर ठोस कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी? यदि अधीनस्थ स्तर पर आदेशों का पालन नहीं हो रहा, तो क्या प्रशासनिक सख्ती दिखाई जाएगी?मेंडू रोड की यह कथित अवैध कॉलोनी अब प्रशासन के लिए एक परीक्षा बन चुकी है। आगामी समयसीमा तक यदि स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तो यह मामला केवल एक कॉलोनी विवाद नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता रहेगा। ईएमएस / 19/04/2026