क्षेत्रीय
19-Apr-2026
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आदिवासियों के जमीन नामांतरण मामले में प्रशासनिक कार्यवाही पर उठ रहे सवाल बालाघाट.बालाघाट (ईएमएस). ंपत्तियों के खेल पर आयकर विभाग की कार्रवाई ने सनसनी फैला दी है। इस कार्रवाई ने न केवल एक बड़े संगठित नेटवर्क की ओर इशारा किया है, बल्कि नेता, बिल्डर, व्यापारी और दलालों की कथित मिलीभगत को भी उजागर कर दिया है। वहीं, लंबे समय से चल रहे इस खेल पर प्रशासन की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है। जिले में जमीन के नाम पर चल रहे कथित खेल की परतें अब खुलने लगी हैं। आयकर विभाग द्वारा वारासिवनी क्षेत्र के ग्राम तुमाड़ी में आदिवासी नेता गणेश कुमरे के निवास पर की गई छापामार कार्रवाई ने उस नेटवर्क की ओर संकेत किया है, जो वर्षों से आदिवासी जमीनों को निशाना बना रहा था। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने वर्षों से चल रहे इस कथित खेल की भनक स्थानीय प्रशासन को क्यों नहीं लगी? या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जाता रहा? यदि शिकायतें पहले से मिल रही थीं, तो कार्रवाई में इतनी देर क्यों हुई? संगठित नेटवर्क सिस्टम पर हो रहा कार्य सूत्रों के अनुसार, इस पूरे खेल में एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जिसमें नेता, बिल्डर, व्यापारी और जमीन दलाल शामिल बताए जा रहे हैं। आरोप है कि ये लोग आदिवासी जमीनों को औने-पौने दाम में खरीदने के लिए स्थानीय लोगों को मोहरा बनाते हैं और बाद में नामांतरण के जरिए जमीन को सामान्य वर्ग में ट्रांसफर कर मोटे मुनाफे में बेच देते हैं। पर्दे के पीछे सक्रिय हैं बड़े खिलाड़ी इस कथित खेल में आदिवासी नेता को आगे कर पर्दे के पीछे बड़े खिलाड़ी सक्रिय बताए जा रहे हैं। यही कारण है कि आयकर की कार्रवाई के दौरान कई ऐसे चेहरे भी सक्रिय नजर आए, जो सीधे तौर पर सामने नहीं आते, लेकिन जमीन के सौदों में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। शनिवार रात आयकर कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में जमीन कारोबार से जुड़े लोगों की मौजूदगी ने भी इस गठजोड़ की ओर इशारा किया है। एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है मामला आयकर विभाग की कार्रवाई भले ही अब शुरू हुई हो, लेकिन यह स्पष्ट होता जा रहा है कि मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार जिले के प्रभावशाली लोगों तक जुड़े हो सकते हैं। फिलहाल, आयकर विभाग ने आधिकारिक रूप से कोई खुलासा नहीं किया है, लेकिन जिस तरह से जांच आगे बढ़ रही है, उससे आने वाले दिनों में बड़े नामों के सामने आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। भानेश साकुरे / 19 अप्रैल 2026