अंतर्राष्ट्रीय
20-Apr-2026


इस नक्शे में इजराइली सेना की नई ‘डिप्लॉयमेंट लाइन’ दिखाई गई तेहरान,(ईएमएस)। दुनिया भर की नजरें इस वक्त इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहां अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का भारी-भरकम मंच सज रहा है, लेकिन इसी बीच मिडिल ईस्ट के एक दूसरे कोने में ऐसा खेल हो गया है जिसने पूरे अरब जगत की नींद उड़ा दी है। इजराइल ने सीजफायर की आड़ में कुछ ऐसा कर दिया जिसकी लेबनान ने सपने में भी कल्पना नहीं की थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इजराइल की सेना ने एक नया नक्शा जारी किया है। यह बता रहा है कि इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के एक बहुत बड़े हिस्से पर अपना पक्का और स्थायी कब्जा जमा लिया है। रविवार को आईडीएफ की तरफ से जो नक्शा जारी किया गया, वो कोई मामूली कागज का टुकड़ा नहीं है। यह नक्शा मिडिल ईस्ट की बदलती हुई सरहदों का जीता-जागता सबूत है। इस नक्शे में इजराइली सेना की नई ‘डिप्लॉयमेंट लाइन’ यानी सैन्य तैनाती की रेखा दिखाई गई है। ये रेखा इजराइल की सीमा से शुरू होकर लेबनान के भीतर पांच से दस किलोमीटर की गहराई तक जाती है। लेबनान कोई बहुत बड़ा देश नहीं है। दक्षिण से उत्तर तक इसकी पूरी चौड़ाई ही काफी कम है। ऐसे में पूरी दक्षिणी सीमा के साथ-साथ दस किलोमीटर गहरी पट्टी काट लेने का मतलब है कि इजराइल ने लेबनान के एक बहुत बड़े हिस्से को अपने नियंत्रण में ले लिया है। इस नए कब्जे वाले इलाके में लेबनान के दर्जनों ऐसे गांव आते हैं जो कभी आबाद हुआ करते थे। वहां लोग रहते थे, बाजार सजते थे और खेत लहलहाते थे, लेकिन महीनों तक चली बमबारी और युद्ध की विभीषिका के चलते ये सारे गांव अब पूरी तरह वीरान और खंडहर हो चुके हैं। लोग अपनी जान बचाकर उत्तर की तरफ चले गए हैं। अब इन सभी खाली पड़े और बर्बाद हो चुके गांवों पर इजराइल का सीधा और पूर्ण नियंत्रण हो गया है। वहां अब लेबनान के नागरिक नहीं, बल्कि इजराइल के टैंक और सैनिक गश्त कर रहे हैं। यह सब तब हो रहा है जब अभी कुछ ही दिन पहले इजराइल और लेबनान के बीच अमेरिका के भारी दबाव और मध्यस्थता से एक सीजफायर लागू हुआ है। आम तौर पर दुनिया मानती है कि सीजफायर का मतलब है बंदूकें शांत हो जाना और सेनाओं का अपनी-अपनी पुरानी सरहदों में लौट जाना होता है, लेकिन इजराइल ने इस संघर्षविराम की परिभाषा ही बदल कर रख दी है। इजराइल ने अप्रत्यक्ष बातचीत के बाद सीजफायर के कागजों पर दस्तखत तो कर दिए, लेकिन अपनी सेना को वापस बुलाने के बजाय उसे लेबनान के अंदर ही एक नई और पक्की सीमा रेखा पर खड़ा कर दिया है। कूटनीति के जानकारों का मानना है कि लेबनान में लागू किया गया यह सीजफायर दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच हो रही उस बड़ी सौदेबाजी का हिस्सा है, जिसके लिए इस्लामाबाद में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधिमंडल का जमावड़ा लगने वाला है यानी एक तरफ बड़ी ताकतों के बीच इस्लामाबाद के बंद कमरों में शांति की रूपरेखा तय की जा रही है और दूसरी तरफ मैदान पर इजराइल ने अपनी शर्तों के साथ अपनी गोटियां पूरी तरह से सेट कर ली हैं। इजराइल का कहना है कि उसे अपने उत्तरी शहरों और बस्तियों को हिजबुल्लाह के रॉकेट और मिसाइल हमलों से बचाना है। पिछले एक साल से उत्तरी इजराइल के हजारों लोग अपने घर छोड़कर विस्थापितों की जिंदगी जी रहे हैं। इजरायल का साफ स्टैंड है कि जब तक लेबनान की सीमा के अंदर घुसकर यह बफर जोन नहीं बनाया जाएगा, तब तक उत्तरी इजराइल के लोग अपने घरों में सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते। सिराज/ईएमएस 20अप्रैल26