राष्ट्रीय
20-Apr-2026


-हलफनामे में संपत्ति की गलत जानकारी देने का मामला अब पहुंचा चुनाव आयोग कोलकाता,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गरमाया हुआ है, लेकिन इस बार सियासत के साथ-साथ विवाद भी सुर्खियों में हैं। टीएमसी के उम्मीदवार देबाशीष कुमार इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। वजह है आयकर विभाग की छापेमारी, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। बताया जा रहा है कि उनके घर से मिली संपत्तियों और चुनावी हलफनामे में घोषित संपत्तियों के बीच बड़ा अंतर पाया गया है। इस मामले ने उनकी पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला अब चुनाव आयोग तक पहुंच चुका है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले ही देबाशीष की राजनीतिक जमीन खिसक सकती है? इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक देबाशीष कुमार टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और पश्चिम बंगाल की रासबिहारी विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक हैं। पार्टी के अंदर उनकी मजबूत पकड़ है और वे सीएम ममता बनर्जी के करीबी माने जाते हैं। उन्होंने अपने क्षेत्र में संगठन को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर सक्रिय राजनीति करने के कारण पहचान बनाई है। पार्टी ने फिर उन पर भरोसा जताया और उम्मीदवार बनाया है। हालांकि, चुनाव से ठीक पहले सामने आए विवाद ने उनकी राजनीतिक छवि को झटका लगा है और अब उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक आयकर विभाग ने 17 अप्रैल को देबाशीष कुमार और उनके करीबी लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान उनके घर से करीब 1.75 करोड़ रुपए के हीरे और अन्य कीमती सामान बरामद हुआ था। इसके अलावा कई ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं, जो अघोषित संपत्ति और निवेश की ओर इशारा करते हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि इन संपत्तियों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया था। इस कार्रवाई के बाद मामला और गंभीर हो गया और लगातार नई जानकारी सामने आ रही है, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है। आयकर विभाग ने इस पूरे मामले की रिपोर्ट निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेज दी है। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि चुनावी हलफनामे में सही जानकारी देना कानूनी रूप से जरूरी होता है। अगर इसमें गड़बड़ी साबित होती है, तो उम्मीदवार पर कार्रवाई हो सकती है। अब सभी की नजरें चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हैं, जो आगे की दिशा तय करेगा। आयकर विभाग अपनी जांच जारी रखे हुए है। देबाशीष कुमार और उनके सहयोगियों को स्पष्टीकरण देना है। अगर मामला गंभीर निकला तो आगे कानूनी कार्रवाई हो सकती है। 29 अप्रैल को वोटिंग होगी और 4 मई को नतीजे आएंगे। फिलहाल रासबिहारी सीट पर सस्पेंस बना हुआ है। टीएमसी कह रही है कि वे जनता के साथ हैं और चुनाव जीतेंगे, लेकिन छापे की छाया अब उनके प्रचार पर पड़ रही है। सिराज/ईएमएस 20अप्रैल26