नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को केस से अलग करने की मांग की थी। अब इस मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ही करेगी। इस मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। अब केस में अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होगी। जस्टिस शर्मा ने इस मामले में केजरीवाल और अन्य आरोपियों को सीबीआई की याचिका पर जवाब दाखिल करने का एक और आखिरी मौका दिया है। जस्टिस शर्मा ने कहा कि बिना किसी फैसले के आवेदन से हट जाना सबसे आसान रास्ता होता, लेकिन उन्होंने इस मामले पर फैसला करने का विकल्प चुना, क्योंकि इसमें संस्थान से जुड़ा एक बड़ा सवाल शामिल था। यह काम उन विरोधाभासी तर्कों के कारण और भी कठिन हो गया था, जहां एक ओर यह दावा किया गया कि जज की ईमानदारी पर कोई संदेह नहीं है, वहीं दूसरी ओर किसी वास्तविक पूर्वाग्रह के बजाय केवल एक कथित आशंका के आधार पर मामले को ट्रांसफर करने का अनुरोध किया गया। जस्टिस शर्मा में कहा कि मैं केस की सुनवाई करने से इनकार नहीं करूंगी। मैंने जज के रूप में शपथ ली है। उन्होंने कहा, मैं यह याचिका रिजेक्ट करती हूं। क्योंकि मेरी शपथ संविधान से है। मेरी शपथ ने सिखाया है कि न्याय किसी दबाव में झुकने से नहीं होता। मेरा ये ही संकल्प है और रहेगा। मैं बिना किसी डर और भेदभाव के इंसाफ करूंगी। उन्होंने कहा कि जजों पर निजी हमले असल में संस्था पर हमले होते हैं, जिनके जख्म न्यायपालिका को सालों तक झेलने पड़ते हैं। उन्होंने कहा, मेरे लिए यहां एक Catch-22 (दुविधापूर्ण) स्थिति पैदा हो गई है। इससे केजरीवाल के लिए Win-Win स्थिति बन जाती है। अगर मैं खुद को केस से अलग कर लेती हूं, तो केजरीवाल कहेंगे, देखो, मैं सही था। अगर मैं खुद को अलग नहीं करती और भविष्य में उन्हें मुझसे कोई राहत नहीं मिलती, तो वे कहेंगे कि उन्हें तो नतीजे का पहले से ही पता था। अगर मैं आज खुद को अलग कर लेती हूं, तो इससे राजनेताओं के लिए अपनी पसंद की अदालत चुनने के दरवाजे खुल जाएंगे। अगर मैं आज खुद को अलग कर लेती हूं, तो ऐसा होगा जैसे मैं अपने कर्तव्य से मुंह मोड़ रही हूं। जस्टिस शर्मा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने बहस के दौरान कई बार कहा है कि वे मेरी ईमानदारी पर शक नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनके मन में कुछ शंकाएं हैं। केजरीवाल के मन में ऐसी भ्रांतियां होना, खुद को केस से अलग करने का आधार नहीं बन सकता। दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए तारीखें तय कर दी हैं। 29 और 30 अप्रैल और मई के पहला हफ्ते में शराब नीति मामले में आरोप-मुक्ति के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर दलीलें पेश की जाएंगी। सुबोध/२० -०४-२०२६