अंतर्राष्ट्रीय
21-Apr-2026
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मुनीर ईरान के साथ पुराने रिश्तों का इस्तेमाल कर रहा वाशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिकी-ईरान के बीच अस्थायी सीजफायर और शांति वार्ता को लेकर पाकिस्तान के शक्तिशाली सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर इनदिनों अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बढ़ती नजदीकियों और ईरान की खुफिया एजेंसियों के साथ पुराने रिश्तों का इस्तेमाल कर अमेरिका और ईरान के बीच शांति के लिए रास्ता तैयार किया है। बताया जा रहा है कि मुनीर वर्तमान में अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और फारस की खाड़ी में नौसैनिक नाकाबंदी को लेकर जारी बातचीत में एक अनौपचारिक बैक चैनल के रूप में काम कर रहे हैं। हालांकि, मुनीर की ये दोहरी भूमिका अमेरिकी विशेषज्ञों के बीच संदेह भी पैदा कर रही है। पाकिस्तानी रिटायर्ड जनरल अहमद सईद ने बताया कि मुनीर कई महीनों से वाशिंगटन और तेहरान के बीच अनौपचारिक बैक-चैनल की भूमिका निभा रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ संघर्ष, परमाणु कार्यक्रम और फारस की खाड़ी में नौसेना ब्लॉकेड खत्म करने के लिए बातचीत कर रहा है। सईद ने दावा किया कि मुनीर की ईरान में स्वीकार्यता का कारण उनके पुराने सैन्य और खुफिया संबंध हैं। मुनीर के संबंध ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के साथ साल 2016-17 से हैं, जब वो सैन्य खुफिया महानिदेशक थे। इन्हीं पुराने रिश्तों के दम पर, जब मुनीर तेहरान पहुंचे और उन्होंने वरिष्ठ ईरानी सैन्य अधिकारियों के साथ बैठकें कीं, जबकि वह ट्रंप और उनकी टीम के साथ भी सीधे संपर्क में बने हुए हैं। मुनीर की बढ़ती शक्ति के बीच विशेषज्ञों ने ट्रंप प्रशासन को चेतावनी भी दी है। अमेरिकी थिंक टैंक फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के बिल रोगियो का कहना है कि पाकिस्तान के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड को देखकर मुनीर और पाकिस्तानियों पर भरोसा करना ठीक नहीं है। उन्होंने अफगानिस्तान का उदाहरण देकर कहा कि पाकिस्तान एक विश्वासघाती सहयोगी रहा है, जिसने दोस्ती का नाटक करते हुए तालिबान का समर्थन किया था। मुनीर के आईआरजीसी के साथ संबंध ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ा रेड फ्लैग या खतरे का संकेत होने चाहिए। मुनीर के कार्यकाल में पाकिस्तान की विदेश नीति पर सेना का नियंत्रण पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। आलोचकों का कहना है कि मुनीर ने राजनीतिक विपक्ष पर नकेल कसी है और सैन्य शक्ति का अभूतपूर्व केंद्रीकरण किया है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के साथ महत्वपूर्ण बातचीत अब इस्लामाबाद से नहीं, बल्कि रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय से संचालित की जा रही है। बता दें कि जनरल मुनीर और डोनाल्ड ट्रंप के बीच संबंधों की शुरुआत मई 2025 में भारत-पाकिस्तान संकट के दौरान हुई थी। तब ट्रंप ने तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसके बाद पाकिस्तान ने ट्रंप का नाम नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया था। उस वक्त युद्ध के मैदान में भारत से बुरी तरह मार खाने के बाद भी उन्हें (मुनीर) पाकिस्तानी सरकार ने पाकिस्तान का फील्ड मार्शल बनाया था, जिस पर दुनिया भर के विशेषज्ञों ने उन्हें फील्ड नहीं, बल्कि पाकिस्तान का फेल्ड मार्शन बताया था। इसतरह अब उन्होंने ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता में खुद को चौधरी बनाने के चक्कर में पाकिस्तान की फजीहत करा दी है, क्योंकि इस्लामाबाद में हुई पहले दौर की शांति वार्ता बेनतीजा रही थी और अब वह फिर से दूसरे दौर की वार्ता के लिए दम भर रहा है। हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि वहां इस वार्ता में शामिल नहीं होगा।इसके बावजूद पाकिस्तान ने अपने दो शहरों को मेहमाननवाजी के लिए सजा दिया है। आशीष/ईएमएस 21 अप्रैल 2026