गयाजी, (ईएमएस)। सोना कारोबारी के कर्मचारी से ट्रेन में करीब 1 किलो सोना लूटे जाने के मामले में पांच महीने बीत जाने के बाद भी राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) चार फरार सिपाहियों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। जीआरपी ने कहा कि मामले की जांच “गंभीरता से” जारी है और लूटे गए 950 ग्राम से अधिक सोने की बरामदगी व आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। जीआरपी के पुलिस अधीक्षक अनंत कुमार राय ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मामले को दबाने की कोई कोशिश नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि इस कांड में आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। ज्ञात हो कि यह घटना 21 नवंबर 2025 को हुई थी, जब सोना कारोबारी मनोज सोनी के कर्मचारी धनंजय शास्वत हावड़ा-जोधपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे में झारखंड के कोडरमा से गया के बीच यात्रा कर रहे थे। इसी दौरान करीब एक किलो सोना लूट लिया गया। जांच में जीआरपी कर्मियों की संलिप्तता सामने आई थी। एक सप्ताह बाद खगड़िया सांसद राजेश वर्मा के हस्तक्षेप के बाद गया जीआरपी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। रेल डीएसपी की जांच में तत्कालीन एसएचओ और चार सिपाहियों की भूमिका सामने आई, जिसके बाद एसएचओ को गिरफ्तार कर निलंबित कर दिया गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 308, 351, 281, 197 और 107 के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं 7 और 13(2) भी जोड़ी गई हैं। जांच के दौरान पहले अनुसंधानकर्ता विरेंद्र प्रसाद की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर केस की जांच विशेष जांच टीम (एसआईटी) को सौंप दी गई। एसआईटी ने कुल आठ लोगों की संलिप्तता पाई, जिनमें पांच पुलिसकर्मी शामिल हैं। इस मामले में सोना कारोबारी मोहित कुमार को आंशिक बरामदगी के बाद गिरफ्तार किया गया। लूटे गए सोने को कथित तौर पर दूसरे आरोपी परवेज के ठिकाने पर काटकर टुकड़ों में बांटा गया था, जिसने बाद में कोर्ट में सरेंडर कर दिया। चारों फरार सिपाहियों की अग्रिम जमानत याचिका गया जिला अदालत ने खारिज कर दी है। पुलिस अब भी उनकी तलाश में जुटी हुई है। संतोष झा-२१ अप्रैल/२०२६/ईएमएस