2023 से 2026 तक खरीदे गए फर्नीचर का होगा भौतिक सत्यापन, स्वीकृति से अधिक खरीदी पर रहेगी नजर रायसेन। सरकारी स्कूलों में फर्नीचर खरीदी में हुई गड़बड़ियों पर लगाम कसने के लिए अब जिला प्रशासन सख्त हो गया है। जिले के हर स्कूल में कुर्सी, टेबल और अन्य फर्नीचर की गिनती कराई जाएगी। इसके तहत वर्ष 2023 से 2026 तक उपलब्ध कराए गए फर्नीचर का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं स्वीकृति से अधिक फर्नीचर की खरीदी तो नहीं की गई। जिला शिक्षा विभाग ने इस संबंध में निर्देश जारी करते हुए सभी संकुल प्राचार्यों और स्कूल प्रमुखों को तय समय में रिपोर्ट देने को कहा है। अधिकारियों के मुताबिक, कई स्थानों से फर्नीचर खरीदी में अनियमितताओं की शिकायतें मिली थीं। खासतौर पर सिलवानी क्षेत्र में दो करोड़ रुपए से अधिक के फर्नीचर घोटाले का मामला सामने आने के बाद विभाग ने यह कदम उठाया है। स्कूल शिक्षा विभाग में हुए फर्नीचर घोटाले के चलते अब हर हर स्वीकृति स्कूल में मौजूद कुर्सी टेबल सहित अन्य फर्नीचर की भौतिक सत्यापन किए जाने के आदेश शासन स्तर पर हुए हैं इसके लिए स्कूल में संकुल प्राचार्य और शिक्षकों की टीम बढ़ाई जाएगी इसके बाद यह सभी फर्नीचर को सूची बनाएंगे और उसे भोपाल भेजेंगे इसमें जरा भी गड़बड़ी हुई तो सीधे कार्रवाई भी की जाएगी बताया जाता है कि रायसेन जिले के सिलवाडी क्षेत्र में करीब 2 करोड रुपए ऐसा फर्नीचर स्कूल में भिजवाया गया जिसका यहां जरूरत ही नहीं थी बच्चों के भेजने के लिए टाट पट्टी ही नहीं थी और यहां रिवॉल्विंग कुर्सी और टेबल भेजी गई थी। खास बात यह है कि जितनी कुर्सियां टेबल भेजी गई उतने शिक्षक ही नहीं थे। जब फर्नीचर घोटाले का मामला मप्र विधानसभा में गूंजा तो रायसेन जिला शिक्षा विभाग में ऐसा लगा मानो भू -चाल आ गया हो। स्कूल-स्कूल जाकर होगी जांच निर्देशों के अनुसार, गठित टीमें.... हरेक सरकारी स्कूलों की होगी फर्नीचर की जांच। गठित की गई टीमें स्कूलों का दौरा करेंगी और मौके पर मौजूद फर्नीचर का मिलान रिकॉर्ड से करेंगी। हर कुर्सी, टेबल, बेंच, आलमारी सहित अन्य सामग्री की संख्या दर्ज की जाएगी। इसके साथ ही खरीदी के बिल, स्टॉक रजिस्टर और स्वीकृति आदेशों का भी मिलान किया जाएगा। यदि किसी स्कूल में स्वीकृत संख्या से अधिक फर्नीचर पाया जाता है या रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है। सिलवानी में फर्नीचर घोटाले के बाद बढ़ी सख्ती.... कुछ समय पहले सिलवानी में सामने आए फर्नीचर घोटाले ने जिला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे। जांच में सामने आया था कि कागजों में बड़ी मात्रा में फर्नीचर खरीदा गया।जबकि वास्तविकता में उतनी सामग्री स्कूलों में मौजूद नहीं थी। इस मामले में करोड़ों रुपए के गबन की आशंका जताई गई थी। इसी घटना के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने एमपी के पूरे जिले साहित रायसेन जिले में फर्नीचर की जांच पड़ताल कराने का निर्णय लिया है, ताकि ऐसी अनियमितताओं को दोहराया न जा सके। डिजिटल रिकॉर्ड भी होंगे अपडेट... जिला शिक्षा विभाग अब फर्नीचर का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की दिशा में भी काम कर रहा है। प्रत्येक स्कूल को अपने यहां उपलब्ध फर्नीचर का डेटा ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट करना होगा। इससे भविष्य में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को आसानी से पकड़ा जा सकेगा। इनका कहना है.... विभाग की सख्त चेतावनी.... जिला शिक्षा विभाग के डीईओ डीडी रजक ने स्पष्ट किया है कि इस बार सत्यापन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रिपोर्ट में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित प्राचार्य, संकुल प्राचार्य और जिम्मेदार कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। डीईओ श्री रजक का कहना है कि यह अभियान पारदर्शिता लाने और सरकारी राशि के सही उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए चलाया जा रहा है। छात्रों को मिले बेहतर सुविधाएं, यही मकसद.... फर्नीचर खरीदी का मुख्य उद्देश्य छात्रों को बेहतर बैठने और पढ़ाई की सुविधा देना है।लेकिन अनियमितताओं के चलते यह उद्देश्य प्रभावित हो रहा था। अब जिला शिक्षा विभाग की कोशिश है कि हर स्कूल में उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग हो और छात्रों को मूलभूत सुविधाएं मिल सकें।इस सख्ती के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि स्कूलों में फर्नीचर खरीदी में पारदर्शिता आएगी और भविष्य में इस तरह के घोटालों पर रोक लग सकेगी। एमपी के रायसेन में अजब गजब फर्नीचर घोटाला.... एमपी के रायसेन जिले में हायर सेकेंडरी स्कूलों में अजब गजब फर्नीचर घोटाले का मामला सामने आया है ।मनमानी और लापरवाही का आलम यह है कि इन सरकारी स्कूल में बिना आर्डर पहुंचा दिया गया 2 करोड रुपए का सामान ।अब बिल भुगतान के लिए स्कूल के प्राचार्य ने शिकायत की तो बवाल मच गया। स्कूलों में बच्चों के बैठने की जगह तक नहीं थी वहां फर्नीचर भेजा गया था। हैरानी की बात तो यह है कि कई हायर सेकेंडरी स्कूलों में इन फर्नीचर की ज़रूरत तक नहीं थी। इसके बावजूद कॉन्फ्रेंस टेबल घूमने वाली कुर्सियां भिजवाई गई हैं।वहीं स्कूलों के प्रिंसिपलों का कहना है कि क्लर्क के द्वारा तैयार किए गए ऑर्डर के लिए तो उसने बड़े अधिकारियों से परमिशन लेना तक मुनासिब नहीं से समझा । हमने सरकारी नियमों का पालन किया था।हमने जब विरोध किया तो ऊपर का आदेश देकर हम पर यह दबाव बनाया गया है। मालूम हो कि सिलवानी ब्लॉक में करीब पौने दो करोड़ रुपए का स्टेशनरी घोटाला भी उजागर हुआ था। लगभग तेरह स्कूल हुए प्रभावित... इस घोटाले में एक स्कूल नहीं बल्कि रायसेन जिले की सिलवानी तहसील के 13 स्कूल प्रभावित हुए हैं ।इन 13 स्कूलों में 11.5 -11.5 लाख रुपए का फर्नीचर भिजवाया गया । विडंबना देखीए कि कई स्कूलों में बच्चों के बैठने की जगह तक नहीं वहां लाखों रुपयों का फर्नीचर बिना बुलाए मेहमानों की तरह पसरे हुए हैं। सिलवानी विकासखंड के हायर सेकेंडरी स्कूलों में 30-35 रिवॉल्विंग कुर्सियों और बड़ी कॉन्फ्रेंस टेबल भेजी गई थी। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुआर, खैरी, कीरतपुर, सीयलवाडा, करतौली, चीकली, देवरी हथनापुर, खमरिया खुर्द, चंदन पिपरिया, नारायण पुर, प्रतापगढ़, और सांईखेड़ा हायर सेकेंडरी स्कूल सहित कई स्कूल शामिल हैं। किशोर वर्मा ईएमएस रायसेन 21/04/2026