नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली समेत एनसीआर की सड़कों से निकलते समय आपको डिवाइडरों पर रंग-बिरंगे फूल और किनारे पर कतारबद्ध पौधे दिखेंगे। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि पिछले पांच सालों में करोड़ों पौधे रोपे गए, लेकिन यक्ष प्रश्न यह है कि अगर करोड़ों हाथ धरती को हरा भरा करने के लिए बढ़े तो आज भी शहर की हवा में दम घोंटू धुंध क्यों है? आज पृथ्वी दिवस है और धरती मांकी सेहत के लिए हरियाली ही जरूरी नहीं है, सही हरियाली जरूरी है। पृथ्वी का तापमान निरंतर बढ़ रहा है, ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण से इसके अस्तित्व पर गहरा संकट है। आमजन के जीवन को खतरा गहरा रहा है, लेकिन पौधारोपण एक सरकारी चलन सा होकर रह गया है। पृथ्वी दिवस से तीन दिन सीरीज आरंभ कर रहा है जिसमें एनसीआर में पौधारोपण की हकीकत जांची जाएगी ताकि विकास की चमक -धमक के पीछे छिपे इस पर्यावरणीय धोखे को उजागर कर सकें। हम यह भी बताएंगे कि हरियाली क्या है? कम जगह में ज्यादा आक्सीजन देने वाले जंगलों की जरूरत क्यों है? उन करोड़ों रुपयों का क्या हुआ जो ग्रीन बेल्ट के नाम पर खर्च हुए, लेकिन जमीन पर सिर्फ धूल व सूखी लकड़ियां बची हैं। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ ईएमएस/22/अप्रैल /2026