राष्ट्रीय
22-Apr-2026
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20 साल पुराने मामले में अहम फैसला, आरोप तय करने के आदेश को अदालत ने किया रद्द मुंबई,(ईएमएस)। वर्ष 2006 के बहुचर्चित मालेगांव ब्लास्ट मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने इनके खिलाफ आरोप तय करने वाले आदेश को रद्द कर दिया, जिसके साथ ही इन आरोपियों पर चल रहा मुकदमा भी समाप्त हो गया। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और जस्टिस श्याम चांदक की डिवीजन बेंच ने यह फैसला आरोपियों द्वारा दायर अपीलों पर सुनाया। इन अपीलों में सितंबर 2025 में विशेष अदालत द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें आरोप तय किए गए थे। अदालत ने न केवल आरोप तय करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए तर्कों को स्वीकार किया, बल्कि मामले में सह-आरोपियों को पहले ही बरी किए जाने के पहलू को भी ध्यान में रखा। जिन चार आरोपियों को इस फैसले में राहत मिली है, उनमें राजेंद्र चौधरी, धन सिंह, मनोहर राम सिंह नरवारिया और लोकेश शर्मा शामिल हैं। हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद इन सभी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही पूरी तरह समाप्त हो गई है। इससे पहले अदालत ने अपील दायर करने में हुई 49 दिनों की देरी को भी माफ कर दिया था। बेंच ने माना कि यह अपील राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अधिनियम की धारा 21 के तहत एक वैधानिक अपील है, इसलिए देरी को स्वीकार किया जाना उचित है। गौरतलब है कि मालेगांव में 8 सितंबर 2006 को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 37 लोगों की जान चली गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। इस घटना के बाद अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामले की प्रारंभिक जांच महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने की थी, जिसने 12 लोगों को गिरफ्तार कर दिसंबर 2006 में आरोपपत्र दाखिल किया। बाद में फरवरी 2007 में जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई और फिर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मामले की जिम्मेदारी संभाली। एनआईए ने आगे की जांच में नए आरोपियों को शामिल करते हुए संशोधित चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें इन चारों के नाम भी शामिल थे। हिदायत/ईएमएस 22अप्रैल26