लेख
22-Apr-2026
...


कांग्रेस के सांसद केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विशेषाधिकार का प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपा है। लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर वेणुगोपाल ने आरोप लगाया है, 18 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम जो संबोधन किया है उस संबोधन में लोकसभा सदस्यों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की है। संसद सदस्यों की सोच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सांसद ने अपने पत्र में कहा है, कि राष्ट्र के नाम संबोधन में संसद की गरिमा और सांसदों के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है, प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी सांसदों के मतदान और उनकी मंशा को लेकर जो कहा है, वह अवमानना की श्रेणी में आता है। यह बेहद गंभीर मामला है, इस पर तत्काल कार्यवाही की जानी चाहिए। वेणुगोपाल ने अपने पत्र में कहा, यह सिर्फ एक संसद सदस्य के विशेष अधिकार का मामला नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की गरिमा और संसद की स्वतंत्रता पर गहरा आघात है। उन्होंने इस पत्र में लोकसभा अध्यक्ष से मांग की है, इस तरह की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। इस मामले में विशेष अधिकार हनन की कार्यवाही तुरंत शुरू की जानी चाहिए। लगता है कांग्रेस आक्रामक होती चली जा रही है। कांग्रेस लंबे समय तक सत्ता में रही है, जिसके कारण उसे विरोध करने के तौर-तरीके नहीं आते थे। जिस तरह से कांग्रेस के सांसद केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए राष्ट्र के संबोधन को सांसदों के विशेष अधिकार से जोड़कर निशाना साधा है, उसको देखते हुए यह कहा जा सकता है, कांग्रेस ने लंबे समय तक विपक्ष में रहते हुए सत्ता पक्ष को न केवल जवाब देना सीख लिया है वरन सत्ता पक्ष को कैसे घेरा जाता है, यह अच्छी तरह से जान लिया है। सत्ता पक्ष जिस तरह से विपक्षी नेताओं को घेरने के लिए सत्ता एवं संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग करता है। लोकतंत्र और कानून के नाम पर विपक्ष को आतंकित करके रखा था। उससे अब कांग्रेस बाहर निकल रही है। सत्ता पक्ष को वह उसी अंदाज में न केवल जवाब देना सीख गई है, वरन अदालतों में भी सत्ता पक्ष को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। अदालतों में मुखर होकर अपनी बात कहना, अदालतों के निर्णय सत्ता पक्ष के लिए अलग और विपक्ष के लिए अलग तरह का विरोध अदालत के सामने किया जाने लगा है। आसंदी के सामने भी विपक्ष दिनों-दिन मुखर हो रहा है। इससे सत्ता पक्ष के लिए मुसीबतें बढ़ रही हैं। न्यायपालिका की कुर्सी में बैठे हुए जजों के लिए भी सत्ता पक्ष का समर्थन आंख बंद करके करना मुश्किल हो रहा है। विपक्ष में अब एक नया संगिठत बदलाव देखने को मिल रहा है। कांग्रेस जिस तरह से आक्रामक हो रही है, निश्चित रूप से उसकी गुरु जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी ही बनी है। जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी जब विपक्ष में थी उस समय जिस तरह का विरोध करती थी, अब उसी आक्रामकता से विरोध करना कांग्रेस ने सीख लिया है। प्रमाण के साथ विरोध करना सीख लिया है। विपक्षी सांसद अब बिना डरे हुए अपनी बात कहना सीख गए हैं। जिसके कारण सत्ता पक्ष की परेशानी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, सत्ता पक्ष की जवाबदेही भी बढ़ रही है। न्यायपालिका में बैठे हुए जजों के लिए अब आसान नहीं है, वह सरकार की दबाव में निर्णय कर सकें। बार-काउंसिल, हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता भी मुखर होकर, आक्रामक होकर, अपना पक्ष न्यायालयों के सामने रख रहे हैं। न्यायपालिका में अभी जो सरकारी दबाव देखने को मिलता था, उसमें विपक्ष अब सेंध लगाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है। इस बात को इस तरह से समझा जा सकता है। एसआईआर और ईड़ी के मामले में जिस तरह से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में स्वयं आकर जिस तरह से अपना पक्ष रखा है। हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट में पूर्व, मुख्यमंत्री केजरीवाल ने स्वर्णकांता शर्मा के सामने अपना पक्ष रखा है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में 23 तारीख और 29 तारीख को मतदान होना था। इसी बीच संसद का विशेष सत्र बुलाकर जिस तरह से नारी बंधन अधिनियम को चुनावी मुद्दा बनाने का विरोध विपक्ष कर रहा है। संसद से बिल पास नहीं होने पर प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन करते हुए जिस तरह से विपक्षी दल कांग्रेस और विपक्ष को निशाने पर लिया। उसको देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विशेषाधिकार का नोटिस देकर कांग्रेस ने सत्ता पक्ष को चुनौती देते हुए बताया है, कि वह झुकने और दबने वाली नहीं है। कांग्रेस शायद अच्छी तरह से समझ गई है, जो डरा वह मरा। रही सही कसर ईरान ने पूरी कर दी है। जिसने अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश को अपनी आत्म शक्ति और आक्रामकता के बल पर अमेरिका को घुटनों पर ला दिया है। कांग्रेस भी विरोध की ताकत को समझ गई है। ममता दीदी भी प. बंगाल में पुरजोर मुकाबला कर रही है। विपक्ष की यह आक्रमकता सत्ता पक्ष के लिये मुसीबत का कारण बन रही है। ईएमएस / 22 अप्रैल 26