अंतर्राष्ट्रीय
23-Apr-2026
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वाशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव फिलहाल थमा गया है, लेकिन हालात अभी भी नाजुक बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी सीजफायर बढ़ाने का ऐलान कर दिया है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने साफ कर दिया कि ईरान पर सैन्य नाकेबंदी जारी रहेगी। ट्रंप के मुताबिक यह फैसला पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर के अनुरोध पर किया गया है। दोनों नेताओं ने अमेरिका से अपील की थी कि बातचीत को मौका देने के लिए हमले टाले जाएं। इसी वजह से अमेरिका ने हमला रोककर सीजफायर बढ़ाया है, लेकिन सैन्य तैयारियां जारी रखी गई हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने अपने सबसे बड़े दबाव वाले हथियार नाकेबंदी को बरकरार रखा है। खासतौर पर होर्मुज और ईरानी बंदरगाहों के आसपास लागू यह नाकेबंदी व्यापार और तेल सप्लाई पर असर डाल रही है। अमेरिकी ट्रेजरी से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक यह रणनीति ईरान की आर्थिक ताकत को कमजोर करने के लिए अपनाई गई है। यहां तक कहा गया है कि खर्ग आइलैंड पर तेल स्टोरेज कुछ ही दिनों में भर सकता है, जिससे ईरान के पास तेल स्टोर करने की जगह नहीं होगी और उसके तेल के कुएं बंद हो जाएंगे। इससे तेल कारोबार पर और दबाव बढ़ेगा। इस बीच, कूटनीतिक मोर्चे पर भी अनिश्चितता बनी हुई है। इस्लामाबाद में प्रस्तावित अगली वार्ता अभी तक तय नहीं हो सकी है.।ईरान ने अमेरिका के रुख को ‘विरोधाभासी’ बताया है और साफ किया है कि वह जल्दबाजी में बातचीत के लिए तैयार नहीं है। ईरान की ओर से भी सख्त चेतावनी दी गई है। एक वरिष्ठ सलाहकार ने ट्रंप के सीजफायर विस्तार को ‘बेकार’ बताया, जबकि ईरानी नेतृत्व ने कहा कि बातचीत के दौरान किसी भी हमले को वैश्विक स्तर पर खतरनाक उदाहरण माना जाएगा। उधर, यूरोप भी इस संकट को लेकर सक्रिय हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही सीजफायर लागू है, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी ‘शांति के नीचे छिपी जंग’ जैसे हैं। दोनों पक्ष एक तरफ बातचीत कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ दबाव और चेतावनियों का खेल भी जारी है। सिराज/ईएमएस 23 अप्रैल 2026