23-Apr-2026
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कोर्ट से चारों आरोपी बरी, अब नहीं होगी कोई ट्रायल, 19 साल बाद यह मामला पूरी तरह खत्‍म मुंबई,(ईएमएस)। मालेगांव ब्‍लास्‍ट मामले में मुंबई हाईकोर्ट ने फैसला देते हुए चारों आरोपियों को बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के चार्ज फ्रेम करने के आदेश को रद्द कर दिया। अब इस मामले में कोई भी ट्रायल नहीं चलेगा। जनवरी 2026 में ही ट्रायल पर रोक लगाई जा चुकी थी। इस तरह 19 साल बाद यह मामला पूरी तरह से खत्‍म हो गया है। इस धमाके में 31 लोग मारे गए थे और 312 घायल हुए थे। यह धमाका 8 सितंबर 2006 को दोपहर 1.50 बजे मालेगांव में चार बम ब्‍लास्‍ट हुए थे। इनमें हमीदिया मस्जिद, बड़ा कब्रिस्तान के परिसर में और एक मुशावर्त चौक पर ब्‍लास्‍ट पर हुआ था। कोर्ट ने कहा कि एटीएस और एनआईए की चार्जशीट में कहानी पूरी तरह उल्टी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मामले में बरी किए गए चार आरोपी मनोहर नरवारिया, राजेंद्र चौधरी, धन सिंह और लोकेश शर्मा शामिल हैं। इन्होंने हाईकोर्ट में अपील की थी कि एनआईए के पास उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस एससी चंदक की बेंच ने फैसले में कहा कि इकबालिया बयान जबरन लिए गए थे और बाद में कोर्ट ने इन्हें गलत माना है। स्वामी असीमानंद के बयान के आधार पर ही इन्हें फंसाया गया था। हैदराबाद और अजमेर की कोर्ट ने इस बयान को जबरन लिखवाना बताकर खारिज कर दिया था। अपील में यह भी कहा गया है कि सिर्फ तीन परिस्थितियां थीं, जिस आधार पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। इसमें ब्लास्ट साइट की जानकारी, साइकिल खरीदने का आरोप और 6.5 साल बाद आईडेंटिफिकेशन परेड शामिल है। पहले एटीएस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। 2016 में एनआईए की विशेष अदालत ने उनके खिलाफ केस खत्म कर बरी कर दिया था। एनआईए ने 2011 में सीबीआई से केस अपने हाथों में लिया और 2012-13 में इन चारों को गिरफ्तार किया था। तीन अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं कोर्ट में वकील गिरिश कुलकर्णी और कौशिक म्हात्रे ने दलील दी कि एनआईए के पास कोई ठोस सबूत नहीं थे। एनआईए की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अपील का विरोध किया था, लेकिन कोर्ट ने आरोपियों की दलील मंजूर कर ली। एनआईए ने मिट्टी के सैंपल में आरडीएक्‍स पाया था, लेकिन अपील में कहा गया कि सैंपल घटना के 7 साल बाद उठाए गए थे। सिराज/ईएमएस 23अप्रैल26 --------------------------------