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25-Apr-2026
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हाईकोर्ट ने की पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत खारिज, कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट में देगी चुनौती -रमेश ने कहा-धमकी, डराने व उत्पीड़न की राजनीति के खिलाफ न्याय की ही जीत होगी नई दिल्ली,(ईएमएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा की गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। इसके बाद कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट करते हुए पवन खेड़ा का मजबूती से समर्थन किया। उन्होंने लिखा- पूरी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अपने मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा के साथ मजबूती से खड़ी है। गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी को पूरा भरोसा है कि धमकी, डराने-धमकाने और उत्पीड़न की राजनीति के खिलाफ अंततः न्याय की ही जीत होगी। यह विवाद पवन खेड़ा द्वारा की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद शुरू हुआ। खेड़ा ने आरोप लगाया था कि असम के सीएम हिमंत विश्व सरमा की पत्नी के पास कई पासपोर्ट हैं और विदेशों में उनकी अघोषित संपत्तियां हैं। इन गंभीर आरोपों के बाद सीएम की पत्नी रिनीकी भुइयां ने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में पवन खेड़ा के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पवन खेड़ा ने सोमवार को गुवाहाटी हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था, जिसे शुक्रवार को जस्टिस पार्थिव ज्योति सैकिया की एकल पीठ ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कई अहम बातें कहीं। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इसे केवल मानहानि का साधारण मामला नहीं माना जा सकता, जिसमें दुर्भावना या साजिश न हो। कोर्ट के मुताबिक प्रथम दृष्टया यह मामला फर्जी दस्तावेजों या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड रखने से संबंधित है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता पुलिस जांच से बच रहे हैं। इस मामले में पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरुरी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनके सहयोगी कौन हैं, उनके लिए ये दस्तावेज किसने जुटाए और ये दस्तावेज कहां से और कैसे हासिल किए गए। इस मामले में पवन खेड़ा ने कई अदालतों का दरवाजा खटखटाया है। हैदराबाद के निवासी होने के कारण, मामला दर्ज होने के बाद पवन खेड़ा ने सबसे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया था। वहां से उन्हें सात दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मिल गई थी। इसके बाद असम पुलिस ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर अंतरिम रोक लगा दी और पवन खेड़ा को संबंधित राज्य यानी असम के गुवाहाटी हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया था। अब गुवाहाटी हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद कांग्रेस ने वापस सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर ली है। न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि जो आरोप उन्होंने लगाए हैं, वे कुछ दस्तावेजों पर आधारित हैं, जो उनके पास हैं जबकि पुलिस ने दावा किया कि उन दस्तावेजों को पहले ही फर्जी साबित किया जा चुका है। कोर्ट ने कहा कि मामला दर्ज होने के बाद याचिकाकर्ता ने यह कहीं नहीं कहा कि पुलिस ने झूठे या मनगढ़ंत दावे किए हैं। न्यायाधीश ने कहा कि महाधिवक्ता का यह दावा कि याचिकाकर्ता का मामला जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड रखने की श्रेणी में आता है, प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि रिंकी भुइयां असम के मुख्यमंत्री की पत्नी हैं, लेकिन स्वयं मुख्यमंत्री नहीं हैं। आदेश में कहा गया है, यदि खेड़ा ने ये आरोप मुख्यमंत्री के खिलाफ लगाए होते, तो यह मामला राजनीतिक बयानबाजी माना जा सकता था, लेकिन राजनीतिक लाभ लेने के लिए उन्होंने एक निर्दोष महिला को विवाद में घसीट लिया। सिराज/ईएमएस 25अप्रैल26 --------------------------------