-अगर लैंगिक अंतर कम हो जाए, तो बढ़ सकती है 30 फीसदी तक जीडीपी इस्लामाबाद,(ईएमएस)। पाकिस्तान की आबादी का करीब आधा हिस्सा महिलाएं हैं, लेकिन काम करने की उम्र वाली महिलाओं में से सिर्फ हर चार में से एक ही काम करती है, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा पांच में से चार का है। यह जानकारी करांची स्थित अखबार में प्रकाशित एक लेख में दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जो महिलाएं काम करती हैं, उनमें से ज्यादातर कृषि क्षेत्र में हैं, जबकि 15 फीसदी से भी कम महिलाएं औपचारिक नौकरी में हैं। बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ 3.6 फीसदी है, जो दिखाता है कि वे देश के औद्योगिक विकास से काफी हद तक बाहर हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में महिलाओं की औद्योगिक क्षेत्र में भागीदारी कई पुरानी समस्याओं के कारण सीमित है। इनमें शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण की कमी, महिलाओं द्वारा चलाए जाने वाले व्यवसायों के लिए वित्त तक सीमित पहुंच और कार्यस्थलों पर सुरक्षा, लचीलापन, चाइल्डकेयर और उत्पीड़न से सुरक्षा की कमी शामिल है। इन समस्याओं को सामाजिक मान्यताएं और भी बढ़ा देती हैं, जो महिलाओं की आवाजाही को सीमित करती हैं और उन्हें घर के बाहर काम करने से हतोत्साहित करती हैं। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी सिर्फ समानता का सवाल नहीं है, बल्कि पाकिस्तान के औद्योगिक भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। अगर महिलाओं की भागीदारी नहीं बढ़ती, तो आर्थिक लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मुताबिक अगर कामकाजी भागीदारी में लैंगिक अंतर कम हो जाए, तो पाकिस्तान की जीडीपी 30 फीसदी तक बढ़ सकती है, जबकि विश्व बैंक के मुताबिक इससे 75 से 85 अरब डॉलर तक का फायदा हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर महिलाओं की भागीदारी में सिर्फ 10 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाए, तो देश की सालाना आर्थिक वृद्धि दर में 1.5 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है, जो समावेशिता की ताकत को दर्शाता है। सिराज/ईएमएस 24 अप्रैल 2026