- मुश्किल नहीं है मलेरिया को हराना (विश्व मलेरिया दिवस (25 अप्रैल) पर विशेष) मलेरिया आज भी उन पुरानी और अत्यंत खतरनाक बीमारियों में से एक है, जो हर वर्ष लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करता है और असंख्य परिवारों को शोक में डुबो देता है। यह एक ऐसा रोग है, जो पूरी तरह रोके जाने योग्य होने के बावजूद आज भी वैश्विक स्वास्थ्य संकट के रूप में मौजूद है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि मलेरिया से होने वाली अधिकांश मौतें छोटे बच्चों में होती हैं, विशेष रूप से पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में, जो इस बीमारी के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। मलेरिया का संबंध एक सूक्ष्म लेकिन अत्यंत घातक परजीवी से है, जो संक्रमित मादा एनोफेलीज मच्छर के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश करता है। जब यह मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो प्लाज्मोडियम नामक परजीवी रक्त में पहुंचकर पहले यकृत पर हमला करता है और फिर लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट करना शुरू कर देता है। यही कारण है कि मलेरिया केवल एक साधारण बुखार नहीं बल्कि शरीर की आंतरिक संरचना को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाला रोग है। वैश्विक स्तर पर मलेरिया की स्थिति आज भी चिंताजनक बनी हुई है। हाल के वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि हर वर्ष करोड़ों लोग इस बीमारी की चपेट में आते हैं और लाखों लोग अपनी जान गंवा देते हैं। 2024 में मलेरिया से लगभग 6.1 लाख मौतें इस बात का प्रमाण हैं कि यह बीमारी अभी भी नियंत्रण से बाहर हो सकती है, यदि इसके प्रति जरा भी लापरवाही बरती जाए। यह केवल स्वास्थ्य का ही नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास का भी प्रश्न है क्योंकि मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में उत्पादकता घटाता है, स्वास्थ्य प्रणाली पर बोझ बढ़ाता है और गरीबी के चक्र को गहरा करता है। मलेरिया की सबसे खतरनाक विशेषता इसकी जटिलता और विविधता है। प्लाज्मोडियम के कई प्रकार होते हैं, जिनमें से फाल्सीपेरम सबसे घातक माना जाता है। यदि इसका समय पर उपचार न किया जाए तो यह गंभीर एनीमिया, किडनी फेल्योर, मस्तिष्क संबंधी जटिलताओं और अंततः मृत्यु का कारण बन सकता है। यही कारण है कि मलेरिया के उपचार में देरी या लापरवाही सीधे जीवन के लिए खतरा बन जाती है। कई बार लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर परिणामों का कारण बनता है। हालांकि आशा की किरण भी उतनी ही मजबूत है। विज्ञान ने मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। नए टीकों का विकास, उन्नत दवाएं, कीटनाशक युक्त मच्छरदानियां और डिजिटल निगरानी प्रणाली इस दिशा में बड़ी प्रगति का संकेत हैं। मलेरिया के लिए विकसित कुछ टीकों ने यह साबित किया है कि मलेरिया को नियंत्रित करना अब केवल कल्पना नहीं बल्कि वास्तविकता बन सकता है। कई देशों में इन टीकों का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है और लाखों बच्चों को इससे सुरक्षा भी मिल रही है। इसके अतिरिक्त, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग मलेरिया संभावित क्षेत्रों की पहचान करने में किया जा रहा है। इससे समय रहते रोकथाम के उपाय किए जा सकते हैं। आनुवंशिक रूप से संशोधित मच्छरों पर भी शोध जारी है, जिनके माध्यम से मलेरिया के प्रसार को नियंत्रित करने की संभावना तलाश की जा रही है। ये सभी प्रयास इस बात के संकेत हैं कि यदि वैश्विक समुदाय एकजुट होकर कार्य करे तो मलेरिया को जड़ से समाप्त करना संभव है। इसके बावजूद, चुनौतियां कम नहीं हैं। जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और कीटनाशकों के प्रति मच्छरों की बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता इस लड़ाई को और कठिन बना रही है। तापमान और वर्षा के पैटर्न में बदलाव के कारण मच्छरों का फैलाव नए क्षेत्रों तक पहुंच रहा है, जिससे मलेरिया का खतरा भी बढ़ रहा है। इसके अलावा, कई विकासशील देशों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, जागरूकता का अभाव और आर्थिक संसाधनों की सीमाएं इस बीमारी के नियंत्रण में बाधा बनती हैं। यही कारण है कि विश्व मलेरिया दिवस 2026 की थीम ‘मलेरिया को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध: अब हम कर सकते हैं, अब हमें करना ही होगा’ अत्यंत प्रासंगिक है। यह थीम केवल एक नारा नहीं बल्कि एक चेतावनी है कि अब और देरी की गुंजाइश नहीं है। हमारे पास संसाधन हैं, तकनीक है और अनुभव भी है, आवश्यकता केवल दृढ़ इच्छाशक्ति और समन्वित प्रयास की है। मलेरिया के लक्षणों में तेज बुखार, कंपकंपी, अत्यधिक पसीना, सिरदर्द, उल्टी और कमजोरी शामिल हैं। कई मामलों में यह रोग इतनी तेजी से गंभीर रूप ले लेता है कि मरीज को संभलने का अवसर तक नहीं मिलता। मलेरिया से बचाव के उपाय अत्यंत सरल लेकिन प्रभावी हैं। साफ-सफाई का ध्यान रखना, घर और आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छरदानी का उपयोग करना, पूरी आस्तीन के कपड़े पहनना और समय-समय पर कीटनाशकों का छिड़काव करना इस बीमारी को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से बरसात और गर्मी के मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक है,त्र क्योंकि यही वह समय होता है, जब मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ती है। किसी भी प्रकार के बुखार को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि तेज बुखार, ठंड लगना या अन्य लक्षण दिखाई दें तो तुरंत जांच करानी चाहिए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार शुरू करना चाहिए। शुरुआती चरण में ही सही उपचार मिलने से मलेरिया को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है और गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। सरकारों और स्वास्थ्य संस्थाओं की भूमिका भी इस दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना, दूरस्थ क्षेत्रों में जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना, जागरूकता अभियान चलाना और मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त बजट सुनिश्चित करना अनिवार्य है। इसके साथ ही, समुदाय की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है, क्योंकि बिना जनसहयोग के कोई भी स्वास्थ्य अभियान सफल नहीं हो सकता। वैश्विक स्तर पर मिली सफलताएं यह दर्शाती हैं कि यदि निरंतर प्रयास किए जाएं तो मलेरिया को नियंत्रित करना संभव है। कई देशों ने इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया है और अनेक देश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। यह उपलब्धियां हमें प्रेरित करती हैं कि हम भी इस दिशा में ठोस कदम उठाएं और मलेरिया मुक्त भविष्य की ओर बढ़ें। मलेरिया के खिलाफ यह लड़ाई केवल चिकित्सा या विज्ञान की नहीं बल्कि जागरूकता, जिम्मेदारी और सामूहिक संकल्प की लड़ाई है। यदि हम समय रहते सावधानी बरतें, लक्षणों को नजरअंदाज न करें और उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही न करें तो हजारों-लाखों जानें बचाई जा सकती हैं। अब समय आ गया है कि हम इस बीमारी को एक सामान्य समस्या मानने की भूल न करें बल्कि इसे एक गंभीर चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए इसके उन्मूलन के लिए एकजुट हों। मलेरिया का अंत संभव है लेकिन इसके लिए हमें अपनी आदतों, नीतियों और प्राथमिकताओं में बदलाव लाना होगा। जब हर नागरिक जागरूक होगा, हर समुदाय सक्रिय होगा और हर सरकार प्रतिबद्ध होगी, तभी यह सपना साकार होगा। यह केवल स्वास्थ्य का नहीं बल्कि मानवता के भविष्य का प्रश्न है। अब हमें यह तय करना है कि हम इस चुनौती के सामने झुकेंगे या इसे परास्त कर एक स्वस्थ, सुरक्षित और मलेरिया मुक्त विश्व का निर्माण करेंगे। (लेखिका डेढ़ दशक से अधिक समय से शिक्षण क्षेत्र में सक्रिय शिक्षाविद हैं) ईएमएस / 24 अप्रैल 26