नई दिल्ली,(ईएमएस)। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की सूची में शामिल टेक कंपनी डेल टेक्नोलॉजीज के संस्थापक माइकल डेल और उनकी पत्नी सुसान डेल इन दिनों अपनी दरियादिली को लेकर खूब चर्चा में हैं। हाल ही में इस दंपत्ति ने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास एट ऑस्टिन को 6,900 करोड़ रुपये यानी 750 मिलियन डॉलर दान में देने का ऐलान किया है। कुछ ही समय पहले इन्होंने बच्चों के भविष्य के लिए 6.25 अरब डॉलर यानी करीब 52,000 करोड़ रुपए देने का संकल्प लिया था। माइकल और सुसान डेल यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास को अब तक 9,200 करोड़ रुपए से ज्यादा का दान दे चुके हैं। माइकल इसी यूनिवर्सिटी के छात्र रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक माइकल डेल की नेटवर्थ करीब 170 अरब डॉलर है। उनकी पत्नी सुसान डेल, माइकल एंड सुसान डेल फाउंडेशन के जरिए स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में दशकों से सक्रिय हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास एट ऑस्टिन को माइकल और सुसान ने मेडिकल सेंटर बनाने के लिए दान दिया है। 300 एकड़ में फैले इस रिसर्च कैंपस को देश का पहला ‘एआई-नेटिव’ अस्पताल कहा जा रहा है। इसका लक्ष्य एआई के जरिए मरीजों की जटिल बीमारियों का सटीक इलाज ढूंढना और मेडिकल रिसर्च की गति को बढ़ाना है। इस प्रोजेक्ट के 2030 तक पूरा होने की उम्मीद है। बता दें माइकल डेल का जन्म 23 फरवरी 1965 को ह्यूस्टन, टेक्सास में हुआ था। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास एट ऑस्टिन में दाखिला लिया, लेकिन अपनी डिग्री पूरी नहीं की। 1984 में मात्र 19 साल की उम्र में उन्होंने अपने कॉलेज के हॉस्टल के कमरे से कस्टमाइज्ड कंप्यूटर बनाकर बेचने का काम किया। उस समय उनके पास न तो बड़ी टीम थी और न ही बड़ा निवेश, लेकिन तकनीक की गहरी समझ ने उनके इस छोटे से स्टार्टअप को उड़ान दी। धीरे-धीरे काम इतना बढ़ा कि उन्होंने कॉलेज बीच में ही छोड़ दिया और अपना पूरा समय बिजनेस को देने लगे। माइकल डेल की सबसे बड़ी ताकत उनकी बिजनेस रणनीति थी। डेल ने सीधे ग्राहकों को उत्पाद बेचना शुरू किया। इससे न केवल बिचौलियों का कमीशन खत्म हुआ और लागत कम हुई, बल्कि ग्राहकों को उनकी जरूरत के हिसाब से ‘कस्टमाइज्ड’ पीसी मिलने लगे। सिराज/ईएमएस 24अप्रैल26