- हाईकोर्ट ने भोपाल गैस मेमोरियल निर्माण के संबंध में कार्ययोजना प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए जबलपुर, (ईएमएस)। म.प्र. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विवेक कुमार सिंह व न्यायाधीश अजय कुमार निरंकारी की संयुक्तपीठ ने प्रदेश के राज्य सरकार को पीथमपुर स्थित रामकी व री-सस्टेनेबिलिटी वेस्ट मैनेजमेंट फैसिलिटी में दबाई गई यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे से निकली 900 मीट्रिक टन राख की टाक्सिसिटी के संबंध में आंकलन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही न्यायालय ने भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्टरी परिसर को सुरक्षित कर भोपाल गैस मेमोरियल बनाए जाने के संबंध में कार्य-योजना प्रस्तुत करने के भी निर्देश भी दिए हैं। संयुक्तपीठ ने उक्त निदेशो कें साथ मामले की अगली सुनवाई 22 जून को निर्धारित की है। गौरतलब है कि वर्ष 2004 में सामाजिक कार्यकता आलोक प्रताप सिंह ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनष्टीकरण की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकता की मृत्यु के बाद उच्च न्यायालय द्वारा मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में की जा रही है। प्रकरण में पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से पेश रिपोर्ट में बताया गया था कि न्यायालय के पूर्व में पारित आदेश के अनुसार यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का विनष्टीकरण सफलतापूर्वक पीथमपुर स्थित सुविधा केंद्र में कर दिया गया है। जहरीले कचरे से लगभग 900 मीट्रिक टन राख व अवशेष एकत्रित हुआ है। इस दौरान उच्च न्यायालय में दायर अन्य याचिका में कहा गया था कि जहरीले कचरे से निकली राख और अवशेष में यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की राख में रेडियो-एक्टिव पदार्थ सक्रिय हैं, जो चिंता का विषय है। राख में मरकरी है, जिसे नष्ट करने की तकनीक सिर्फ जापान व जर्मनी के पास है। आबादी वाले क्षेत्र से 500 मीटर दूर पर उनकी लैंड फिलिंग की जा रही है। उचच न्यायालय ने उक्त याचिका की सुनवाई मुख्य याचिका के साथ किए जाने की व्यवस्था दे दी थी। याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने गत 8 अक्टूबर, 2025 को जारी अपने आदेश में सरकार के द्वारा इंसानों की आबादी से सिर्फ 500 मीटर दूर लैंड फिलिंग का स्थान निर्धारित किए जाने पर रोक लगा दी थी। बाद में राज्य शासन के आवेदन पर उच्च न्यायालय ने उक्त आदेश वापस ले लिया था। मामले पर पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया था कि जहरीले कचरे से निकाली राख की लैंड फिलिंग का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया था कि भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्टरी परिसर को सुरक्षित कर भोपाल गैस मेमोरियल का निर्माण कराया जाएगा। इस सिलसिले में हुई बैठक में सेंट्रल पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन रूल्स 2025 के तहत शार्ट-टेंडर जारी करने का निर्णय लिया गया है। परिसर की सफाई, टाक्सिक वेस्ट को हटाने एव आस-पास की खराब मिट्टी और ग्राउंड वाटर के सुधार, खराब प्लांट स्ट्रक्चर के डिटॉक्सिफिकेशन और डीकंटैमिनेशन के संबंध में बैठक में चर्चा की गई थी। इस दौरान बीजीपीएसएसएस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने दबाई गयी जहरीली राख के पूरे असेसमेंट के लिए म.प्र. उच्च न्यायालय के समक्ष आवेदन पेश करने निर्देश जारी किए थे जिसके बाद बीजीपीएसएसएस की ओर से उच्च न्यायालय में इंटरविनर बनने आवेदन पेश किया गया था। न्यायालय ने सुनवाई के बाद आवेदन स्वीकार करते हुए उक्त निर्देश जारी किए। - 24 अप्रैल 2026/ 03.14