राष्ट्रीय
26-Apr-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत में डायबिटीज के मरीजों का आंकडा अगले कुछ सालों में 15 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। दुनिया भर में डायबिटिज एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन गई है, जहां 10 करोड़ से अधिक लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। इस महामारी से प्रभावित मरीजों को अपने ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के लिए दवाइयों, इंसुलिन, और सख्त जीवनशैली नियमों का पालन करना पड़ता है। इसी क्रम में, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने डायबिटीज के मरीजों के लिए शराब के सेवन को बेहद खतरनाक बताया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर ब्लड शुगर के स्तर को अस्थिर कर देता है और गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का कारण बन सकता है। ऐसे मरीजों को शराब का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शराब का सबसे गहरा प्रभाव लिवर पर पड़ता है, जो शरीर में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब कोई व्यक्ति शराब का सेवन करता है, तो लिवर अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी, यानी ग्लूकोज को नियंत्रित करने के बजाय शराब को मेटाबोलाइज करने में व्यस्त हो जाता है। इस प्रक्रिया के कारण, रक्त में ग्लूकोज का स्तर अचानक और नाटकीय रूप से गिर सकता है, जिसे हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिम भरी हो सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जिनका शुगर लेवल अक्सर ऊपर-नीचे होता रहता है। ऐसे मामलों में शराब का सेवन जानलेवा भी साबित हो सकता है। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि कुछ अल्कोहलिक पेय जैसे बीयर, कॉकटेल और कई प्रकार की शराब में चीनी और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा काफी अधिक होती है। ऐसे पेय पदार्थों का सेवन करने से ब्लड शुगर का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। शराब की यही अनिश्चित प्रकृति, यानी कभी शुगर को बहुत कम करना और कभी बहुत अधिक बढ़ा देना, इसे डायबिटीज के मरीजों के लिए इतना खतरनाक बनाती है। कई बार लोग शराब पीते समय अस्वस्थ और उच्च कैलोरी वाले स्नैक्स का भी सेवन करते हैं, जिससे शरीर में चीनी और कैलोरी की मात्रा और भी बढ़ जाती है, परिणामस्वरूप शुगर लेवल और भी अधिक बिगड़ जाता है। इसके अतिरिक्त, शराब का सेवन डायबिटीज की दवाइयों के प्रभाव को भी प्रभावित कर सकता है। यह दवाओं के असर को कम या ज्यादा कर सकता है, जिससे मरीज का इलाज बुरी तरह प्रभावित होता है और स्थिति बिगड़ सकती है। लंबे समय तक शराब का सेवन करने से शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे नसों, आंखों और किडनी पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। डायबिटीज के मरीजों में पहले से ही इन अंगों के प्रभावित होने का खतरा अधिक होता है, और शराब इस जोखिम को कई गुना बढ़ा देती है। शराब शरीर में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का कारण भी बनती है, जिससे शरीर का आंतरिक संतुलन बिगड़ सकता है और कई अन्य जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों की कड़ी सलाह है कि यदि डायबिटीज का मरीज किसी भी स्थिति में शराब का सेवन करता भी है, तो उसे बेहद कम मात्रा में और पूरी सावधानी के साथ करना चाहिए। खाली पेट शराब पीने से पूरी तरह बचना चाहिए, क्योंकि यह शुगर लेवल को तेजी से गिरा सकता है। सुदामा/ईएमएस 26 अप्रैल 2026