ट्रेंडिंग
26-Apr-2026
...


नेता अक्सर व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए पार्टी बदल लेते अहिल्यानगर (ईएमएस)। महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने पर प्रतिक्रिया देकर सख्त दलबदल विरोधी कानून की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में नेता अक्सर व्यक्तिगत स्वार्थ के आधार पर पार्टी बदल लेते हैं, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान होता है। सामाजिक कार्यकर्ता हजारे ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान का मूल उद्देश्य समाज और राष्ट्र का कल्याण है, न कि राजनीतिक दलों के हितों की रक्षा। उनके अनुसार, आज समाज में बढ़ते विवाद और टकराव के पीछे राजनीतिक पार्टियों की भूमिका भी बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि जब तक दलबदल को रोकने के लिए कठोर कानून नहीं बनेगा, तब तक नेता अपने फायदे के लिए दल बदलते रहने वाले है। उन्होंने कहा कि अगर एक प्रभावी और सख्त दलबदल विरोधी कानून लागू होता है, तब इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर सांसदों के इस कदम की आलोचना करने से परहेज कर कहा कि अंतिम जिम्मेदारी जनता की है। सामाजिक कार्यकर्ता हजारे ने मतदाताओं को लोकतंत्र का “राजा” बताकर कहा कि सही और गलत का निर्णय अंततः जनता के हाथ में होता है। अगर मतदाता सोच-समझकर और जागरूक होकर वोट देता हैं, तब राजनीतिक दलों में फैली अनियमितताओं को सुधारा हो सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीति में “सत्ता से पैसा और पैसे से सत्ता” का एक दुष्चक्र चल रहा है, जो भ्रष्टाचार और गलत कार्यों को बढ़ावा देता है। गौरतलब है कि राघव चड्ढा और हरभजन सिंह सहित सात राज्यसभा सांसदों ने आप पार्टी को छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। बताया जा रहा है कि पार्टी के भीतर मतभेद और टकराव की स्थिति पिछले कुछ समय से बनी हुई थी। यह विवाद उस समय सार्वजनिक हुआ जब राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने प्रेसवार्ता कर पार्टी छोड़ने की घोषणा की। इसके बाद ये नेता भाजपा कार्यालय पहुंचे और पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उनका स्वागत किया। उनके साथ अन्य सांसद—हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता—का भी पार्टी में शामिल होना एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम पर अन्ना हजारे का बयान राजनीतिक नैतिकता और मतदाता जागरूकता की अहमियत को एक बार फिर सामने लाता है। आशीष दुबे / 26 अप्रैल 2026