राज्य
26-Apr-2026
...


रविंद्र भवन में हुई सुंदरकांड की दिव्य प्रस्तुति भोपाल (ईएमएस)। मानव जीवन में हम राक्षसी प्रवृत्ति की तरह हैं या साधु प्रवृत्ति की तरह यह हमारे कर्म निश्चित करते हैं हमारे कर्मों के आधार पर हमारी प्रवृत्ति जब साधु की तरह हो जाती है तो भगवान स्वयं हमें प्रेम करने लगते हैं और हमारा जीवन स्वयं सुंदरकांड बन जाता है| रविंद्र भवन के मुक्ताकाश मंच पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में बाबूलाल भगवती सोनी ट्रस्ट द्वारा आयोजित सुंदरकांड की दिव्य प्रस्तुति देते हुए उक्त उद्गार मानस मयंक पंडित अजय याज्ञिक ने व्यक्त किये । आज के सुंदर कांड का विषय जहां सुमति तहं संपत्ति नाना जहां कुमति तहं विपति निदाना पर प्रकाश डालते हुए पंडित याज्ञिक ने कहा जब तक जीवन में सुमति अर्थात अच्छी बुद्धि नहीं होगी तब तक राम की प्राप्ति संभव नहीं है कुमती को सुमति की ओर ले जाने का कार्य श्री हनुमान जी करते हैं महावीर विक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमित के संगी हमारे अंदर जो कुमति का राक्षस बैठा है सदगुरु हनुमान जी उसको साधु के रूप में बदल देते हैं मूल तत्व भी यही है भगवान राक्षस नहीं साधु को प्रेम करते हैं हमारे जीवन में जब यह साधुता आ जाती है तो हमारा जीवन स्वयं ही सुंदरकांड बन जाता है इसके बाद ही हमें राम की प्राप्ति होती है क्योंकि स्वयं भगवान राम ने भी कहा है निर्मल मन जन सो मोहि पावा मोहि कपट छल छिद्र न भावा उन्होंने कहा हमेशा बड़े होने का दंभ हमारे सुखी जीवन को खत्म कर देता है जीवन में हम बड़े तो बन जाते हैं पर हमें छोटा बनना नहीं आता हनुमान जी ने जब लंका में प्रवेश किया तो मच्छर से छोटा रूप बना लिया मसक समान रुप कपी धारी वही सुरसा माता के मुख में सौ योजन का शरीर बनाया फिर छोटे बनकर बाहर निकल आए वहीं रावण को बड़ा बनना तो आया लेकिन वह समय और परिस्थितियों के साथ छोटा नहीं बन सका इसलिए उसका सर्वस्त्र नष्ट हो गया जबकि छोटे से बड़े एवं बड़े से छोटे बने हनुमान जी इतने पूज्य हो गए कि आज विश्व में रामचंद्र जी से ज्यादा हनुमान मंदिर है।प्रारंभ में व्यास पीठ का पूजन एवं बड़ी संख्या में उपस्थित संत महंतों का सम्मान ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रदीप सोनी एवं सचिव प्रमोद नेमा ने किया इस अवसर पर अतिथियों के रूप में करुणाधाम आश्रम के पीठाधीश्वर सुदेश शांडिल्य महाराज महंत अनिलानंद सांसद आलोक शर्मा महापौर मालती राय विधायक भगवानदास सबनानी डीजीपी कैलाश मकवाणा उपस्थित थे। । अंशुल जैन, 26 अप्रैल, 2026