वॉशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ शांति वार्ता के लिए अपने विशेष दूतों की पाकिस्तान यात्रा को रद्द करने के अपने विवादास्पद फैसले का पुरजोर बचाव किया है। पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान की ओर से जो प्रस्ताव दिए गए थे, वे अमेरिकी उम्मीदों और मानकों के अनुरूप नहीं थे। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान ने यूरेनियम संवर्धन पर 20 साल के निलंबन के बदले कोई ठोस पेशकश की थी, तो ट्रंप ने कहा कि ईरान ने बहुत कुछ देने का वादा तो किया, लेकिन वह एक सुरक्षित और स्थायी समाधान के लिए पर्याप्त नहीं था। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस यात्रा को रद्द करने के पीछे कूटनीतिक कारणों के साथ-साथ व्यावहारिक और आर्थिक तर्क भी दिए। उन्होंने खुद को एक किफायती व्यक्ति बताते हुए कहा कि 18 घंटे की लंबी और महंगी हवाई यात्रा पर अपने शीर्ष दूतों को भेजना फिजूलखर्ची होती, विशेषकर तब जब ईरान की ओर से कोई कद्दावर नेता वार्ता की मेज पर मौजूद न हो। ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वे अपने विशेष दूतों जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ को ऐसे लोगों से मिलने के लिए इस्लामाबाद नहीं भेज सकते थे, जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई पहचान नहीं है। उनके अनुसार, ईरान का नेतृत्व इस समय आंतरिक कलह और आपसी झगड़ों में उलझा हुआ है। ट्रंप ने दावा किया कि उनके इस सख्त फैसले का तत्काल सकारात्मक असर देखने को मिला। उन्होंने बताया कि जैसे ही यात्रा रद्द करने की घोषणा हुई, उसके महज 10 मिनट के भीतर ईरान ने एक नया और पहले से बेहतर प्रस्ताव अमेरिका को भेज दिया। ट्रंप ने दोहराया कि उनका एकमात्र और स्पष्ट उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार न हों। उन्होंने कहा कि अमेरिका वर्तमान में बातचीत की बहुत मजबूत स्थिति में है। दूसरी ओर, इस घटनाक्रम पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने नाराजगी जताते हुए अमेरिका की गंभीरता पर सवाल उठाए हैं। अराघची, जो पाकिस्तान में मुख्य मध्यस्थों के साथ बैठक कर रहे थे, ने दावा किया कि उन्होंने युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए एक ठोस योजना साझा की थी। पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, लेकिन ट्रंप के इस अचानक फैसले से क्षेत्रीय शांति प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। 4 मई की समयसीमा नजदीक होने के बावजूद, ट्रंप ने फिलहाल युद्धविराम पर किसी भी विचार से इनकार किया है और स्पष्ट कर दिया है कि अब बातचीत केवल व्हाइट हाउस की शर्तों पर ही होगी। वीरेंद्र/ईएमएस 27 अप्रैल 2026