राष्ट्रीय
27-Apr-2026
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लोग बोले- बंटवारा बहुत कष्टदायी होता है, इस घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया नई दिल्ली,(ईएमएस)। कश्मीर की खूबसूरत वादियों का कुछ हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में है जिसे आज पीओके कहा जाता है। कई बार ऐसी घटनाएं सामने आती हैं जब लगता है कि ये सरहदें खत्म हो जानी चाहिए। उत्तर कश्मीर के केरन में रहने वाले एक तहसीलदार की मौत हो गई उनकी अंतिम यात्रा में सीमा पार के लोग भी शामिल होना चाहते थे। हालांकि मजबूरी में वे नदी के उस पार से ही खड़े अंतिम संस्कार के गवाह बने। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में एलओसी के पास ही केरन गांव है। गांव के पास ही किशनगंगा नदी बहती है जिसे पाकिस्तान में नीलम नदी के नाम से जाना जाता है। यही पाकिस्तान और भारत की सीमा है। केरन के रहने वाले लियाकत अली खान गांदरबल में नायब तहसीलदार थे। दिल का दौरा पड़ने के बाद उनका शनिवार को निधन हो गया। जब उनका शव केरन पहुंचा तो उनकी मौत की खबर सोशल मीडिया पर फैल गई। लियाकत अली के कई रिश्तेदार पीओके में रहते हैं। उनको किशनगंगा नदी किनारे दफनाने के लिए ले जाया गया। लियाकत अली के रिश्तेदार किशनगंगा नदी के किनारे आकर खड़े हो गए। उन सबकी आंखें नम थीं लेकिन कोई अंतिम दर्शन करने भी शव के पास नहीं आ सकता था। क्योंकि बीच में सिर्फ नदी नहीं बल्कि भारत और पाकिस्तान की सीमा थी। रिपोर्ट के मुताबिक गांव के लोगों ने बताया कि पहले लियाकत अली खान भी पीओके चले गए थे लेकिन बाद में वह वापस आ गए। कश्मीर में ही रहकर उन्होंने पढ़ाई की और फिर यहीं शादी हो गई। उनके चार बच्चे हैं। उनके ज्यादातर रिश्तेदार पीओके में हैं। उनकी मां, चाचा और भाई कश्मीर में रहते हैं। लियाकत का शव नदी के किनारे कुछ समय के लिए रख दिया गया ताकि दूर से ही सही उनके अपने आखिरी बार उन्हें देख सकें। एक ग्रामीण ने कहा कि इस घटना ने एक बार सबको झकझोर कर रख दिया है। अलग होना और दूर होना आसान नहीं होता। बंटवारा बहुत कष्टदायी होता है। इधर शव रखा था और नदी के उस पर उनके अपने रो रहे थे। वे केवल दूर से ही उन्हें आखिरी विदाई दे सकते थे। गांव के ही एक शख्स ने कहा कि सरहदों ने लोगों को इस कदर मजबूर कर दिया है कि एक साथ पले-बढ़े अपने रिश्तेदार भी एक मुट्ठी मिट्टी कब्र में नहीं डाल सकते। यह नजारा देख वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गई उनके मन में टीस थी इस तरह दो देशों की सीमा लोगों को मिलने से रोक लेती हैं जो बड़ा दुख दायी है। सिराज/ईएमएस 27अप्रैल26 ---------------------------------