व्यापार
27-Apr-2026


-ये लोगों की बचत और निवेश की आदत को बेहतर करेगा नई दिल्ली,(ईएमएस)। नवंबर 2025 में आठवें वेतन आयोग के गठन के अनुमानों ने भारतीय अर्थव्यवस्था में एक बड़े बदलाव के संकेत दिए है। इसका कुल वित्तीय बोझ केंद्रीय कर्मचारियों पर 3.7 से 3.9 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2016 के सातवें वेतन आयोग से करीब चार गुना अधिक होगा। हालांकि, इसकी असली कहानी केवल इस विशाल खर्च में नहीं, बल्कि भारतीय परिवारों के खर्च और बचत व्यवहार में आने वाले क्रांतिकारी परिवर्तन में छुपी है। इतिहास के मुताबिक भारत में प्रत्येक वेतन आयोग ने एक नई खपत लहर को जन्म दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 1997 में पांचवें वेतन आयोग के बाद, मध्य वर्ग के पास अतिरिक्त पैसा आया और उन्होंने स्कूटर छोड़कर सीधे बाइक का रुख किया, जिससे हीरो होंडा, बजाज ऑटो और टीवीएस जैसी कंपनियों को बड़ा मौका मिला। इसके बाद, 2008 में छठे वेतन आयोग के दौरान, जब दुनिया आर्थिक संकट से जूझ रही थी, तब भारत में सरकारी कर्मचारियों ने कार और घर खरीदे। मारुति सुजुकी की बिक्री में सरकारी कर्मचारियों की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत से बढ़कर 17 प्रतिशत तक पहुंच गई, और एचडीएफसी जैसे आवास ऋण प्रदाताओं का तेजी से विस्तार हुआ। वहीं 2016 के सातवें वेतन आयोग ने हालांकि खपत से अधिक निवेश की आदत को प्रोत्साहित किया। इस दौरान एसआईपी निवेश 3,122 करोड़ से बढ़कर 31,000 करोड़ हो गया, जो यह दिखाता है कि भारतीय परिवारों ने सोने और संपत्ति से हटकर शेयर बाजार में निवेश करना शुरु किया है। वर्ष 2026 में आने वाला आठवां वेतन आयोग बीते सभी वेतन आयोगों से अलग और सबसे बड़ा बदलाव लाने वाला साबित हो सकता है। इस बार सिर्फ वेतन वृद्धि ही नहीं, बल्कि तीन बड़े बदलाव एक साथ हो रहे हैं। पहला, केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी बढ़ेगी, जिससे करीब 50 लाख कर्मचारियों और 65-70 लाख पेंशनर्स को 30-50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी मिल सकती है। यह पैसा मुख्य रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में खर्च होगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती मिलेगी। दूसरा, राज्य सरकारें भी खर्च बढ़ाएंगी क्योंकि राज्यों के लगभग 80 लाख कर्मचारी भी वेतन बढ़ोतरी का लाभ उठाएंगे। कुल मिलाकर, केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों के लिए यह रकम 7–8 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है, जो सीधे अर्थव्यवस्था में बंपर पैसा डालेगी। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए श्रम कानून के कारण आएगा, जिसने सैलरी स्ट्रक्चर को बदल दिया है। अब मूल वेतन और महंगाई भत्ता (बेसिक +डीए) कुल सीटीसी का कम से कम 50 प्रतिशत होना अनिवार्य हो गया है। इससे भविष्य निधि (पीएफ) और सेवानिवृत्ति बचत में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उदाहरण के लिए, 50,000 सैलरी वाले कर्मचारी का पीएफ 3,600 से बढ़कर 6,000 तक हो सकता है। यह बदलाव करीब 10 करोड़ कर्मचारियों को प्रभावित करेगा और लंबी अवधि में लाखों करोड़ की बचत बनाएगा। इस अतिरिक्त धन का खर्च विभिन्न वर्गों में अलग-अलग तरीके से होगा। मध्यम आय वर्ग पैसे को कार, घर, यात्रा, एसआईपी और अन्य निवेशों के साथ-साथ निजी शिक्षा पर खर्च करेगा। वहीं, निम्न आय वर्ग खाना, गैस, मोबाइल, बच्चों की पढ़ाई, छोटे ऋणों की ईएमआई चुकाने और अन्य दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर खर्च करेगा। यही तेजी से घूमने वाला पैसा अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगा। आठवें वेतन आयोग से कई प्रमुख सेक्टरों को सबसे बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। ऑटो सेक्टर में कारों और टू-व्हीलर्स की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। आवास और ऋण क्षेत्र में होम लोन और रियल एस्टेट बाजार में तेजी देखी जाएगी। म्यूचुअल फंड और एसआईपी में लंबी अवधि के निवेश में और उछाल आने की प्रबल संभावना है। एफएमसीजी और उपभोक्ता सामान क्षेत्र में हिंदुस्तान यूनीलीवर, डाबर और वरुण बेवरेजेज जैसी कंपनियों को लाभ मिल सकता है। साथ ही, फाइनेंस और माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में बजाज फाइनेंस, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और छोटे बैंक मजबूत होने है। आशीष दुबे / 27 अप्रैल 2026