क्षेत्रीय
28-Apr-2026
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- 3 घंटे अंचल में रहा दिव्य शिवलिंग कोरबा (ईएमएस) कोरबा अंचल में आर्ट ऑफ लिविंग के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कोरबा वासियों ने दिव्य और दुर्लभ सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए। इस कार्यक्रम में हजारों लोगों ने शिवलिंग के दर्शन किये। घंटाघर क्षेत्र में शिवलिंग दर्शन के साथ आर्ट ऑफ़ लिविंग की ओर से विशेष भजन मंडली द्वारा भजन किया गया। सोमनाथ ज्योर्तिलिंग की विशेष पूजा-अर्चना के बाद महिला और पुरुष के लिए अलग-अलग कतारें, बनाकर शिवलिंग के समीप जाकर उसके दर्शन का मौका लोगों को दिया गया था। मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में गुजरात के सौराष्ट्र स्थित सोमनाथ मंदिर में विदेशी आक्रमणकारी मोहम्मद गजनवी ने लूटपाट करके इस मंदिर को 18 बार लूटा गया था। अंत में दिव्य शिवलिंग को खंडित कर दिया गया था। यह पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। ये पवित्र शिवलिंग लंबे समय तक अग्निहोत्री ब्राह्मणों ने सुरक्षित रखा। 1924 में कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य के निर्देश पर अब 100 साल पूरे होने पर श्रद्धास्वरूप श्री श्री रविशंकर महाराज को सौंप दिया गया। - 40 मिनट तक हुआ रुद्राभिषेक देशभर में इस दिव्य शिवलिंग के दर्शन के लिए आध्यात्मिक आयोजनों की श्रृंखला चल रही है। कोरबा समेत छत्तीसगढ़ में इस दिव्य ज्योतिर्लिंग का दर्शन प्रमुख शहरों में 30 अप्रैल तक लोग कर पाएंगे। कोरबा में यह आयोजन घंटाघर ओपन थियेटर शाम 6 से रात 9 बजे तक आयोजित किया गया। आर्ट लिविंग परिवार सहित कोरबा और आसपास के श्रद्धालुओं ने भी इस दिव्य अवसर का लाभ उठाया। इस दौरान स्वामी प्रणवानंद महाराज के सानिध्य में 40 मिनट का रुद्राभिषेक किया। जिन्हें देश भर में इस दिव्य शिवलिंग को भ्रमण करवाने की जिम्मेदारी श्री श्री रविशंकर ने सौंपी है। कोरबा पहुंचे स्वामी प्रणवानंद महाराज ने बताया कि मान्यता है कि वर्ष 1026 में हुए आक्रमण के दौरान सोमनाथ मंदिर के शिवलिंग को खंडित कर दिया गया था। उस समय कुछ अग्निहोत्री बाह्मणों ने उसके पवित्र अंशों को सुरक्षित कर दक्षिण भारत में संरक्षित किया। करीब एक हजार वर्षों तक यह धरोहर गुरु-शिष्य परंपरा में गुप्त रूप से पूजा किया l वर्ष 1924 में कांची शंकराचार्य ने इसे 100 साल बाद भारत के आजाद होने ओर श्री राम मंदिर बन जाने के पश्चात सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था। इस अवसर पर स्वामी प्रणवानंद महाराज ने कहा कि गुरु जी श्री श्री रविशंकर ने मुझे जिम्मेदारी दी है कि मैं देश भर में भ्रमण करूं और लोगों के बीच जाकर इस दिव्य शिवलिंग के सबको दर्शन करवाऊं, सनातन धर्म के लिए यह खास पल है। - दिव्य शिवलिंग की खासियत वैज्ञानिकों ने यह पाया है कि शिवलिंग में जो चुंबकीय धातु है, उसमें अलौकिक गुण हैं। यह धातु पृथ्वी पर कहीं नहीं मिलती। वैज्ञानिकों निभा कि यह चुंबकीय शिवलिंग पृथ्वी के बाहर से यहां आई है। शिवलिंग के बारे में यह मानता है कि भगवान चंद्रमा ने श्राप से मुक्त होने के लिए सोमनाथ मंदिर की स्थापना की थी, इस शिवलिंग के बारे में भी मान्यता है कि इसने चुंबकीय गुण के कारण कभी जमीन को स्पर्श नहीं किया, यह हवा में तैरता था। यह शिवलिंग जब तक यह सोमनाथ मंदिर में पुनर्स्थापित नहीं हो जाता, तब तक हम देश भर में सनातन धर्म की जागृति के लिए लोगों को यह अवसर दिया गया है। ताकि सभी लोग इस दिव्य शिवलिंग के दर्शन कर सकें। स्वामी प्रणवानंद महाराज ने कहा कि 1000 वर्ष पहले मिटाने का प्रयास किया गया था। आज वह सबके सामने फिर से प्रकट हो चुका है, यही सनातन है। जिसे कोई मिटा नहीं सकता, उसे ही सनातन कहते हैं। - 28 अप्रैल