28-Apr-2026
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-मिट्टी की सेहत जांचने के प्रस्ताव में कर दी 75 प्रतिशत की कटौती पटना(ईएमएस)। बिहार के किसानों के लिए मिट्टी की सेहत की जांच कराना अब और चुनौतीपूर्ण होने वाला है। राज्य सरकार द्वारा किसानों के खेतों की मिट्टी जांच के लिए केंद्र को भेजे गए महत्वाकांक्षी प्रस्ताव पर केंद्र सरकार ने बड़ा झटका दिया है। केंद्र ने बिहार के आगामी वर्ष 2026-27 के प्रस्ताव में 75 फीसदी तक की भारी कटौती कर दी है। राज्य की ओर से केंद्र सरकार को आगामी सत्र के लिए 6 लाख मिट्टी के नमूनों की जांच का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन केंद्र ने केवल डेढ़ लाख नमूनों की जांच के लिए ही अपनी मंजूरी दी है। इस कटौती के बाद अब बिहार का कृषि विभाग नए सिरे से जिलावार लक्ष्य तय करने की प्रक्रिया में जुट गया है, जिसे संशोधित कर पुनः केंद्र को भेजा जाएगा। हैरानी की बात यह है कि बिहार को मिलने वाले मिट्टी जांच के लक्ष्यों में पिछले वर्षों की तुलना में लगातार कमी देखी जा रही है। वर्ष 2025-26 में बिहार को 3 लाख मिट्टी के नमूनों की जांच का लक्ष्य मिला था, जिसे अब आधा कर दिया गया है। इससे पहले 2024-25 में यह लक्ष्य 5 लाख और 2023-24 में 2 लाख था। विशेषज्ञों का मानना है कि लक्ष्य में इस कटौती का असर राज्य की कृषि उत्पादकता पर पड़ सकता है, जबकि बिहार ने हर साल केंद्र द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने का रिकॉर्ड बनाया है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत संचालित होने वाली इस योजना में 60 फीसदी राशि केंद्र सरकार वहन करती है, जबकि शेष 40 फीसदी राशि राज्य सरकार खर्च करती है। मिट्टी जांच की प्रक्रिया किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी वैधता तीन साल तक होती है और इससे मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की कमी या अधिकता का सटीक पता चलता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर किसानों को डिजिटल सॉयल हेल्थ कार्ड प्रदान किया जाता है, जिसमें 106 विभिन्न प्रकार की फसलों, फलों और सब्जियों के लिए उर्वरक की अनुशंसित मात्रा बताई जाती है। इससे किसान अनावश्यक रासायनिक खाद के खर्च से बचते हैं और फसल की पैदावार में भी सुधार होता है। वर्तमान में राज्य के सभी 38 जिलों में मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं, लेकिन केंद्र के नए निर्णय से जमीनी स्तर पर जांच की गति धीमी होने की आशंका बढ़ गई है। वीरेंद्र/ईएमएस/28अप्रैल2026