गुना (ईएमएस) जिल्दबंदोबस्त में शासकीय नं की भूमि पर कॉलोनी काटने के खेल में सुधीर संत की संदिग्ध भूमिका कलेक्टर कार्यालय में बाबूगिरी का बड़ा खेल, अनुमति से पहले ही बाबू ने लिया नजराना गुना (ईएमएस)। जिला प्रशासन की नाक के नीचे कलेक्ट्रेट के गलियारों में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक शुचिता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। यह पूरा प्रकरण कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ बाबू सुधीर कुमार संत और भूमाफियाओं के बीच गहरे गठजोड़ की ओर इशारा करता है। दस्तावेजों की पड़ताल से खुलासा हुआ है कि जिले के एक प्रभावशाली बाबू ने अपने पद का लाभ उठाते हुए, कलेक्टर की आधिकारिक अनुमति मिलने से पहले ही भूमाफिया से नजराने के तौर पर प्लॉट अपने नाम करा लिया। अनुमति बाद में, बाबू की रजिस्ट्री पहले मामला ग्राम जगनपुर के सर्वे क्रमांक 45/3, 45/4 व 68/3 (सांई धाम पार्ट-2) से जुड़ा है। दस्तावेजों के अनुसार, जिल्दबंदोबस्त में शासकीय नं की भूमि पर कॉलोनी विकास की आधिकारिक अनुमति कलेक्टर कार्यालय द्वारा 14 जुलाई 2020 (अनुमति क्रं. 06/वि.अनु./2020) को जारी की गई थी। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि कलेक्टर के बाबू सुधीर कुमार संत ने इस अनुमति के जारी होने से करीब एक माह पहले ही यानी 12 जून 2020 को भूमाफिया अखिलेश जैन से 800 वर्ग फीट के प्लॉट की रजिस्ट्री no.MP 13342020A1254847 अपने नाम करा ली थी। सवाल यह उठता है कि क्या यह प्लॉट उस फाइल को आगे बढ़ाने की कीमत थी जो बाबू के पास लंबित थी? कानून में सिविल सेवा आचरण नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई गई सुधीर कुमार संत पर आरोप है कि उन्होंने केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियमों को ताक पर रखकर अपने वरिष्ठ अधिकारियों को अंधेरे में रखा। एक महत्वपूर्ण सीट पर बैठकर शासकीय कार्यों में पारदर्शिता बरतने के बजाय, भूमाफिया को अनुचित लाभ पहुँचाने और स्वयं के लिए संपत्ति अर्जित करने का यह खेल लंबे समय से चल रहा था। जानकारों का कहना है कि सुधीर संत ने फाइल को क्लीयर करने के बदले में सांठगांठ कर सांई धाम पार्ट-2 में अपना हिस्सा पहले ही सुरक्षित कर लिया था। क्या होगी जांच या फाइल होगी रफा-दफा? यह मामला अब जगजाहिर होने के बाद प्रशासनिक हलकों में हडक़ंप मचा हुआ है। सुधीर कुमार संत के कार्यकाल के दौरान हुई अन्य अनुमतियों और रजिस्ट्रियों पर भी अब संदेह के बादल मंडरा रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि क्या वर्तमान जिला प्रशासन इस काले-पीले खेल की निष्पक्ष जांच कराएगा? क्या सुधीर कुमार संत जैसे रसूखदार बाबू के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, जिन्होंने पद की गरिमा को भूमाफियाओं के चरणों में गिरवी रख दिया? इस पूरे प्रकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि भूमाफिया और प्रशासनिक बाबूओं का सिंडिकेट किस कदर हावी है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस अवैध रजिस्ट्री को शून्य घोषित कर संबंधित बाबू पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है या फिर भ्रष्टाचार की यह फाइल भी दफ्तर की धूल में दबा दी जाएगी।-सीताराम नाटानी