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28-Apr-2026
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-दोनों देशों ने सुरक्षा स्थिति व क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने पर किया विचार-विमर्श नई दिल्ली,(ईएमएस)। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन की मुलाकात हुई। यह मुलाकात एससीओ के रक्षा मंत्रियों की बैठक के इतर हुई। दोनों देशों के रक्षामंत्रियों ने यहां क्षेत्रीय सुरक्षा और आपसी सहयोग पर चर्चा की। राजनाथ यहां एससीओ के अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। वह किर्गिस्तान में रह रहे भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस उच्चस्तरीय बातचीत में दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने एशिया की मौजूदा सुरक्षा स्थिति व क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर विचार विमर्श किया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राजनाथ सिंह ने कहा कि एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान एडमिरल डोंग जुन से बातचीत कर खुशी हुई। रक्षा विशेषज्ञों ने इस मुलाकात को सकारात्मक और रचनात्मक बताया है। इससे पहले राजनाथ ने बिश्केक स्थित विक्ट्री स्क्वायर पर पहुंचकर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की और वीर सैनिकों के बलिदान को नमन किया। राजनाथ सिंह बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने गए हैं। इस अहम बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और सदस्य देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। उन्होंने अपने दौरे के दौरान अन्य सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें करने की बात कही है, जिससे आपसी सहयोग को और मजबूत किया जा सके। बता दें यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और चीन के रिश्ते पिछले कुछ सालों में काफी तनावपूर्ण रहे हैं। 2020 में पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना के बाद द्विपक्षीय संबंधों में गंभीर गिरावट आई और आपसी विश्वास में कमी देखी गई। हालांकि बीते कुछ सालों में संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कई बड़ी पहल की गई हैं। इसी क्रम में यह मुलाकात भी काफी अहम है। बता दें राजनाथ सिंह सोमवार को बिश्केक पहुंचे थे। यहां वह मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। बिश्केक पहुंचने पर उनका स्वागत स्थानीय अधिकारियों द्वारा किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उच्चस्तरीय बैठकों से न केवल क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा मिलता है, बल्कि भारत और चीन जैसे बड़े देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में भी सकारात्मक संकेत मिलते हैं। आने वाले समय में इस बातचीत के ठोस परिणाम सामने आने की उम्मीद है। सिराज/ईएमएस 28अप्रैल26 --------------------------------