अंतर्राष्ट्रीय
29-Apr-2026
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-नेतन्याहू नाराज, गिरफ्तारी वारंट से उनके अंतरराष्ट्रीय दौरों पर लग सकता है विराम तेल अवीव,(ईएमएस)। इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू इन दिनों इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) से नाराज है। नेतन्याहू ने मंगलवार को कहा कि आईसीसी एक भ्रष्ट और नैतिक रूप से दिवालिया संस्था है, जिसे अब बंद कर दिया जाना चाहिए। उनका गुस्सा इस वजह से भी है, क्योंकि गाजा पर हमले के बाद नवंबर 2024 में आईसीसी ने पीएम नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जिस वक्त आईसीसी ने नेतन्याहू की गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था, उस समय हंगरी में विपक्ष के नेता पीटर मग्यार ने कहा था कि अगर नेतन्याहू हंगरी की धरती पर कदम रखते हैं, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। यह इजराइल के लिए एक बड़ा झटका था क्योंकि हंगरी को अब तक इजराइल का करीबी माना जाता रहा है। तब सवाल ये भी उठा था कि क्या आईसीसी के वारंट पर पीएम नेतन्याहू को वाकई गिरफ्तार किया जा सकता है, या फिर यह सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी दांव-पेंच है? आईसीसी के पास अपनी कोई पुलिस नहीं है। वह अपने फैसलों को लागू करने के लिए सदस्य देशों पर निर्भर रहती है। नेतन्याहू की बंद करने वाली मांग के पीछे का असली दर्द यही है कि यह वारंट उनके अंतरराष्ट्रीय दौरों पर विराम लगा सकता है। फिलहाल इजराइल और उसके समर्थक देश इस कोर्ट की साख पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि मानवाधिकार संगठन इसे न्याय की जीत बता रहा हैं। इसे दुनिया की क्राइम ब्रांच समझ लीजिए। 2002 में बनी यह संस्था उन लोगों पर मुकदमा चलाती है जिन्होंने नरसंहार, युद्ध अपराध या मानवता के खिलाफ बड़े अपराध किए हों। इसका मुख्यालय नीदरलैंड में है। रिपोर्ट के मुताबिक तकनीकी रूप से हां, लेकिन व्यवहारिक रूप से बहुत मुश्किल। आईसीसी के पास अपनी पुलिस नहीं है। अगर नेतन्याहू किसी ऐसे देश में जाते हैं जो आईसीसी का सदस्य है, जैसे हंगरी, ब्रिटेन या फ्रांस, तो उस देश की कानूनी जिम्मेदारी बनती है कि वह उन्हें गिरफ्तार करे। यह किसी चंदे पर नहीं चलता। इसके करीब 124 देश सदस्य हैं जो अपनी आर्थिक क्षमता के हिसाब से इसमें योगदान देते हैं। जापान, जर्मनी और फ्रांस जैसे देश इसके सबसे बड़े फंडर्स में शामिल हैं। दुनिया के तीन बड़े ताकतवर देश अमेरिका, रूस और चीन इसके सदस्य नहीं हैं। भारत भी इसका सदस्य नहीं है। इजराइल ने भी इस संधि पर दस्तखत नहीं किए हैं, इसलिए वह कहता है कि आईसीसी का अधिकार क्षेत्र उस पर लागू नहीं होता है। नेतन्याहू का तर्क है कि आईसीसी हमास जैसे आतंकियों और इजराइल एक ही पलड़े में तौल रही है। उनका आरोप है कि कोर्ट उन देशों को निशाना बनाता है जो अमेरिका या पश्चिम के दुश्मन नहीं हैं, जबकि असल अपराधियों को छोड़ देता है। आईसीसी सिर्फ वारंट जारी कर सकता है, लेकिन किसी के घर में घुसकर उसे पकड़ नहीं सकता। गिरफ्तारी के लिए उसे स्थानीय सरकार की मदद चाहिए होती है। रोम स्टैच्यू वह किताब या संधि है जिसके आधार पर आईसीसी बना। जो देश इस पर साइन करता है, वह कोर्ट के हर आदेश को मानने के लिए बाध्य होता है। रिपोर्ट के मुताबिक भले ही गिरफ्तारी न हो, लेकिन वारंट जारी होने के बाद उस व्यक्ति का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घूमना सीमित हो जाता है। व्लादिमीर पुतिन के साथ भी यही हुआ था। अफ्रीका और एशिया के कई देश अक्सर आरोप लगाते हैं कि आईसीसी सिर्फ कमजोर देशों के नेताओं को पकड़ता है, ताकतवर पश्चिमी देशों के नेताओं को कभी हाथ नहीं लगाता। सिराज/ईएमएस 29अप्रैल26