-संयंत्र जब पूरी तरह से चालू होगा, तब बिजली उत्पादन क्षमता 2400 मेगावाट होगी ढाका,(ईएमएस)। बांग्लादेश के ईश्वरदी उपजिला में स्थित रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र में ईंधन लोडिंग का काम शुरू हो गया है। यह इस विशाल संयंत्र को चालू करने की दिशा में बहुत अहम और ऐतिहासिक माना जा रहा है। बांग्लादेश का यह परमाणु ऊर्जा संयंत्र रूस की मदद से तैयार किया गया है। परमाणु ऊर्जा संपन्न होने का मतलब परमाणु बम बनाना नहीं है, बल्कि परमाणु ऊर्जा से बिजली पैदा करना है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश काफी समय से बिजली की कमी से जूझ रहा था। अपनी बढ़ती अर्थव्यवस्था और उद्योगों को चलाने के लिए उसे ऊर्जा स्रोत की जरूरत थी। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए बांग्लादेश ने पबना जिले के रूपपुर में अपना पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने का फैसला किया। इस प्रोजेक्ट को बनाने का ठेका रूस की सरकारी परमाणु कंपनी को दिया गया। अक्टूबर 2023 में रूस ने इस प्लांट के लिए यूरेनियम की पहली खेप बांग्लादेश को सौंप दी। इसके साथ ही बांग्लादेश दुनिया का 33वां ऐसा देश बन गया जिसके पास परमाणु ऊर्जा से बिजली बनाने की क्षमता है। इस प्लांट में 1200-1200 मेगावाट के दो रिएक्टर लगे हैं। 12 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की लागत वाली यह परियोजना रूस की वित्तीय और तकनीकी सहायता से पूरी की जा रही है। पद्मा नदी के तट पर स्थित यह संयंत्र जब पूरी तरह से चालू हो जाएगा, तो इसकी कुल बिजली उत्पादन क्षमता 2400 मेगावाट होगी। इस परमाणु ऊर्जा संयंत्र को चालू करने की प्रक्रिया अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के कड़े दिशा-निर्देशों के मुताबिक चरणबद्ध तरीके से की जा रही है। इसी प्रक्रिया के पहले हिस्से के तहत मंगलवार को यूनिट में ईंधन भरने का काम शुरू कर दिया गया है। इस परियोजना के शुरू होने से बांग्लादेश एक बड़े एलीट क्लब में शामिल होने जा रहा है। उम्मीद है कि इस साल अगस्त तक इस संयंत्र से कम से कम 300 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा और इसे बांग्लादेश के राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ दिया जाएगा। यह लक्ष्य हासिल करते ही बांग्लादेश, भारत और पाकिस्तान के बाद दक्षिण एशिया का तीसरा ऐसा देश बन जाएगा जो परमाणु ऊर्जा से बिजली पैदा करता है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट पैदा हुआ है, जिससे बांग्लादेश भी अछूता नहीं है। इसी संकट से निपटने और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार ने इस साल के अंत तक कम से कम एक यूनिट से राष्ट्रीय ग्रिड में बिजली की आपूर्ति शुरू करने का लक्ष्य रखा है। रिपोर्ट में योजना के मुताबिक ईंधन लोडिंग शुरू होने के लगभग तीन महीने के भीतर पहली यूनिट से पैदा होने वाली बिजली राष्ट्रीय ग्रिड में जोड़ दी जाएगी। इसके बाद कई चरणों में संयंत्र का परीक्षण किया जाएगा और इसकी क्षमता बढ़ाई जाएगी। दिसंबर तक इस संयंत्र से इसकी पूरी क्षमता के साथ बिजली प्रसारण का लक्ष्य रखा गया है। यह प्रोजेक्ट बहुत महंगा है। इसकी कुल लागत करीब 12.65 बिलियन डॉलर है। इसमें से 90फीसदी पैसा रूस ने लोन के रूप में दिया है। आलोचकों का मानना है कि बांग्लादेश की डगमगाती अर्थव्यवस्था के लिए इतना बड़ा कर्ज चुकाना भविष्य में गले की फांस बन सकता है। यह प्लांट पूरी तरह से रूस के कंट्रोल में है। प्लांट को चलाने के लिए यूरेनियम रूस से आएगा और इस्तेमाल होने के बाद जो खतरनाक परमाणु कचरा बचेगा, उसे रूस ही वापस लेकर जाएगा। इसका मतलब है कि बांग्लादेश अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए दशकों तक रूस पर निर्भर रहेगा। यह पूरा प्रोजेक्ट बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना का ड्रीम प्रोजेक्ट था। 2024 में हुए बड़े राजनीतिक तख्तापलट के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़कर भागना पड़ा। अब वहां जो नई अंतरिम सरकार है, उसके सामने इस महंगे प्रोजेक्ट को संभालने और रूस के साथ कूटनीतिक संतुलन बनाने की बहुत बड़ी चुनौती है, क्योंकि नई सरकार को पश्चिमी देशों का भी समर्थन चाहिए, जो रूस के खिलाफ हैं। बता दें रूस ने जेनरेशन 3+ के सबसे सुरक्षित रिएक्टर लगाने का दावा किया है, लेकिन रूपपुर घनी आबादी वाला इलाका है और पद्मा नदी के किनारे है। चेरनोबिल या फुकुशिमा जैसी किसी भी छोटी सी दुर्घटना की कल्पना भी बांग्लादेश के लिए विनाशकारी हो सकती है। रूस की मदद से परमाणु बिजली मिलना बांग्लादेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि जरूर है, लेकिन रूस का भारी कर्ज, अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण पेमेंट में हो रही दिक्कतें और देश की वर्तमान राजनीतिक उथल-पुथल ने इस प्रोजेक्ट को एक दोधारी तलवार बना दिया है। सिराज/ईएमएस 29अप्रैल26