क्षेत्रीय
29-Apr-2026
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वाराणसी (ईएमएस) । आईसीएआर–भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी द्वारा “विश्व बौद्धिक संपदा दिवस 2026” के अवसर पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल एवं प्रभावी आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिकों, शोधार्थियों एवं युवा पेशेवरों के बीच बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उनके शोध कार्यों को पेटेंट के रूप में सुरक्षित करने हेतु प्रेरित करना था। कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक (प्रभार) डॉ. ए. एन. सिंह ने वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान संस्थान की उल्लेखनीय उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि संस्थान ने न केवल उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, बल्कि नवाचारों को बौद्धिक संपदा के रूप में संरक्षित करने की दिशा में भी तेजी से प्रगति की है। उन्होंने विशेष रूप से दो पेटेंट—“कद्दू खीर मिश्रण” तथा “सूखी हरी मिर्च पाउडर”—का उल्लेख करते हुए इनके पोषण, प्रसंस्करण एवं व्यावसायिक संभावनाओं पर प्रकाश डाला, जो किसानों एवं उद्यमियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. रजनीश कुमार सिंह, प्रोफेसर, विधि संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने अपने व्याख्यान में पेटेंट प्रणाली की गहन एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की। उन्होंने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पेटेंट फाइलिंग में लगभग 200% तथा पेटेंट स्वीकृति में 400% की उल्लेखनीय वृद्धि का उल्लेख करते हुए इसे भारत में नवाचार के बढ़ते वातावरण का संकेत बताया। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया कि किन प्रकार के आविष्कार पेटेंट योग्य होते हैं तथा किन्हें पेटेंट नहीं मिल सकता, जिससे प्रतिभागियों की अवधारणाएं और अधिक स्पष्ट हुईं। उक्त सत्र में संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में सहभागिता की। उन्होंने अपने संबोधन में बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व पर बल देते हुए कहा कि वर्तमान समय में अनुसंधान को केवल प्रकाशन तक सीमित न रखते हुए उसे पेटेंट एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से समाज तक पहुँचाना आवश्यक है। उन्होंने पूरे कार्यक्रम का मार्गदर्शन एवं सतत अनुश्रवण किया तथा प्रतिभागियों को नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान विशाल प्रधान द्वारा पेटेंट आवेदन प्रक्रिया पर एक व्यावहारिक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों को पेटेंट खोज (पूर्व कला खोज), आवेदन भरने की प्रक्रिया तथा आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी चरणबद्ध तरीके से प्रदान की गई। इस सत्र ने प्रतिभागियों को व्यावहारिक रूप से पेटेंट फाइलिंग की प्रक्रिया समझने में विशेष सहायता दी। इसके अतिरिक्त, जेडटीएमयू एवं एबीआई प्रकोष्ठ द्वारा एक रोचक प्रश्नोत्तरी सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न प्रकार के बौद्धिक संपदा अधिकारों—जैसे पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क आदि—से संबंधित प्रश्न पूछे गए। इस सत्र ने प्रतिभागियों के बीच ज्ञानवर्धन के साथ-साथ उत्साह एवं प्रतिस्पर्धा की भावना को भी बढ़ावा दिया। यह कार्यक्रम वैज्ञानिकों, प्रधान वैज्ञानिकों, वरिष्ठ वैज्ञानिकों, शोधार्थियों एवं युवा पेशेवरों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक सिद्ध हुआ और उन्हें अपने अनुसंधान कार्यों को पेटेंट के रूप में सुरक्षित करने तथा उनके व्यावसायिक उपयोग की दिशा में सोचने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण से हुई, जिसे डॉ. नीरज सिंह, प्रधान वैज्ञानिक द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. इंदीवर प्रसाद, वरिष्ठ वैज्ञानिक द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। इस अवसर पर डॉ. डी. पी. सिंह (प्रधान वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष), डॉ. पी. एम. सिंह (वरिष्ठ वैज्ञानिक), डॉ. आर. के. दुबे (प्रधान वैज्ञानिक), डॉ. सुदर्शन मौर्य, डॉ. टी. बी. चौबे, डॉ. ज्योति सिंह, डॉ. अर्चना सान्याल सहित अन्य वैज्ञानिक एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुदर्शन मौर्य द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। डॉ नरसिंह राम /29 अप्रैल2026