ज़रा हटके
30-Apr-2026
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वाशिंगटन,(ईएमएस)। नासा के सबसे भरोसेमंद मिशन में से एक क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल ग्रह पर कुछ ऐसा खोज निकाला है जो सीधे-सीधे जिंदगी से जुड़ा है। मंगल ग्रह जिसे हम सूखा, ठंडा और बंजर ग्रह मानते हैं। वहीं से अब मिले हैं ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल ने इस धारण को बदल दिया है। दरअसल सीधी भाषा में ये वहीं केमिकल कंपाउंड्स हैं, जिससे धरती पर जीवन की शुरुआत हुई थी। यानी यह लाइफ के बिल्डिंग ब्लॉक्स माने जाते हैं। क्यूरियोसिटी रोअ ने मंगल के इक्वेटर के पास मौजूद एक सूखी झील यानी कि गेल क्रेटर में सात अलग-अलग ऑर्गेनिक कंपाउंड्स डिटेक्ट किए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यहां यह है कि इनमें से पांच कंपाउंड्स पहले भी कभी मंगल पर दिखाई नहीं दिए। बता दें कि क्या यह मॉलिक्यूल्स इस बात का सबूत है कि मंगल पर कभी जिंदगी थी? लेकिन अभी पक्का नहीं है क्योंकि यह मॉलिक्यूल्स तीन तरीके से आते हैं। प्राचीन माइक्रोस्कोपिक लाइफ से, मेट्रॉइड से या फिर जियोलॉजिक प्रक्रिया से। लेकिन एक बात साफ है कि अगर मंगल पर कभी जिंदगी थी, तब उसके केमिकल निशान आज भी मौजूद है। आज मंगल का टेंपरेचर 100°सेल्सियस तक पहुंच चुका है और बहुत ही पतला एटमॉस्फियर है। खतरनाक सोलर रेडिएशंस हैं। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था। करोड़ों साल पहले वहां पानी बहता था। झीलें थी और एटमॉस्फयर भी थिक था। यानी बिल्कुल वैसा जैसा अर्थ पे होता है। इसलिए वैज्ञानिक मानते हैं कि मंगल पर जीवन की शुरुआत होना पूरी तरह से संभव हो सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यहां ये उठता है क्या इतने पुराने केमिकल ट्रेसेस आज तक सर्वाइव कर सकते हैं? और यहीं पर यह डिस्कवरी बनती है। बता दें कि क्यूरियोसिटी रोवर ने इसतरह के मॉलिक्यूल्स डिटेक्ट किए हैं जैसे कि बेंजोथियोफीन यानी कि सल्फर कंटेनिंग कंपाउंड और इसके साथ ही नाइट्रोजन बेस्ड कंपाउंड्स और इनका स्ट्रक्चर बिल्कुल डीएनए से जुड़ा हुआ है। यानी डीएनए से जुड़े मॉलिक्यूल्स जैसा मिलताजुलता है। ध्यान रखें कि ये डीएनए नहीं है लेकिन डीएनए बनाने वाली बिल्डिंग ब्लॉक जरूर हो सकते हैं। क्यूरियोसिटी मिशन से जुड़ी वैज्ञानिक यानी कि साइंटिस्ट का मानना है कि हम शायद 3 बिलियन साल पुराने ऑर्गेनिक मैटर को देख रहे हैं। अब जरा सोचिए 3.5 अरब साल पुराना केमिकल एविडेंस आज भी मौजूद है। यूरोपियन स्पेस एजेंसी का रोजलैंड फ्रैंकलिन रोअ 2028 में लांच होगा और यह रोअ मंगल की सरफेस के 2 मीटर नीचे तक ड्रिल करेगा क्योंकि सरफेस के नीचे रेडिएशन कम होता है और ऑर्गेनिक मटेरियल ज्यादा सुरक्षित रहते हैं। आशीष/ईएमएस 30 अप्रैल 2026