वैज्ञानिक ने बताया बुद्धिमान बनने का नया तरीका वाशिंगटन (ईएमएस)। हाल ही में ऑस्ट्रिया के न्यूरो साइंटिस्ट पीटर जोन्स ने मस्तिष्क को लेकर एक दिलचस्प दावा किया है। वैज्ञानिकों ने याददाश्त के सबसे जिम्मेदार हिस्से हिप्पोकेंपस का अध्ययन किया है चूहा और नवजात शिशुओं के मस्तिष्क पर शोध कर्ताओं ने शोध में जानकारी दी है की जन्म के समय नवजात के दिमाग में व्यस्त की तुलना में लगभग 2 गुना से ज्यादा कनेक्शन में जानकारी होती है मस्तिष्क में सूचनाओं को सही ढंग से लाने के लिए जानकारी को व्यवस्थित करने के लिए पहले से भरी हुई जानकारी को मिटाना और नई जानकारी को व्यवस्थित तरीके से भरने से बुद्धिमानी बढ़ती है, मस्तिष्क तेज गति से काम करता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इंसान जितना अपने दिमाग को अनावश्यक सूचनाओं और पुराने विचारों से मुक्त करता है, उसकी सोचने-समझने की क्षमता उतनी बेहतर होती जाती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ केवल नई जानकारी जोड़ना ही जरूरी नहीं होता, बल्कि दिमाग में पहले से मौजूद सूचनाओं को व्यवस्थित करना और गैरजरूरी बातों को हटाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, मस्तिष्क में अनुभवों और आदतों के आधार पर कई “न्यूरल पाथवे” यानी मानसिक रास्ते बन जाते हैं। समय के साथ इन रास्तों को व्यवस्थित नहीं किया जाए, तो दिमाग पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने लगता है। इससे निर्णय लेने की क्षमता और रचनात्मक सोच प्रभावित हो सकती है। शोध में पाया गया,जो लोग नियमित रूप से ध्यान, शांत चिंतन, सीमित सूचना ग्रहण और मानसिक विश्राम जैसी आदतें अपनाते हैं। उनका दिमाग अधिक सक्रिय और तेज रहता है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि बुद्धिमत्ता केवल अधिक जानकारी इकट्ठा करने से नहीं आती, बल्कि सही जानकारी को सही समय पर उपयोग करने पर मस्तिष्क की क्षमता विकसित होती है। इस अध्ययन ने उस पारंपरिक धारणा को चुनौती दी है। जिसमें माना जाता था, ज्यादा ज्ञान जमा करना ही बुद्धिमानी की पहचान है। अब वैज्ञानिक मानते हैं, मानसिक स्पष्टता और संतुलन ही तेज दिमाग एवं बुद्धिमान बनने की असली कुंजी है। एसजे/ 9 मई /2026